रंगमंच पर कौशल दिखा पूर्णिया के अमित ने सिने जगत में बनायी पहचान

Edited by ARUN KUMAR
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रंगमंच दिवस पर विशेष

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रंगमंच दिवस पर विशेष पूर्णिया. रंगमंच की दुनिया में अभिनय और निर्देशन का कौशल दिखाते हुए पूर्णिया के अमित झा अब सिने जगत में अपनी कला का जलवा बिखेरने लगे हैं. अमित झा ने रंगकर्म के माध्यम से मंच और थियेटर तक अपनी ऐसी पहचान बना ली है कि अब इस कलाकार को सिने जगत में भी कई अवसर मिल रहे है. वैसे अमित आज भी देश भर में रंगमंच के जरिये अपने अभिनय का जौहर दिखाने की मुहिम में जुड़े हुए हैं. उन्हें गर्व है कि उसका जन्म पूर्णिया की धरती पर हुआ है जो साहित्य, संस्कृति और कला के संवर्धन में हमेशा योगदान देने वाली धरती मानी जाती है.अमित झा ने अभी हाल ही में अमिताभ बच्चन, टाइगर श्रॉफ और कृति सेनोन अभिनीत फिल्म गणपत मे शानदार अपीरियंस के साथ अमित झा ने बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू किया. टेलीविजन शो क्राइम पेट्रोल तथा वेब सीरीज ”काला” में यह अहम किरदार में नजर आ चुके हैं और वेब सीरीज,मिर्जापुर के सीजन थ्री और 20-20 डेल्ही में भी एक खास किरदार निभाया है. लेकिन अमित झा का ऐसा मानना है कि, उनकी पहली प्राथमिकता रंगमंच है इसलिए वह रंगमंच पर अपनी यात्रा को जारी रखेंगे और बड़े पर्दे पर भी काम जारी रहेगा. अमित को इस बात पर गर्व है कि उसका जन्म पूर्णिया की धरती पर हुआ है जो साहित्य, संस्कृति और कला के संवर्धन में हमेशा योगदान देने वाली धरती मानी जाती है. कला-भवन नाट्य विभाग से हुई शुरुआत अमित झा ने अपने रंगमंच जीवन की शुरुआत पूर्णिया के कला-भवन, नाट्य विभाग द्वारा प्रस्तुत नाटक बेचारा कॉमन मैन से की थी. कला भवन मे इन्हें भिखारी ठाकुर सम्मान प्राप्त, वरिष्ठ रंगकर्मी विश्वजीत सिंह छोटू व वरिष्ठ रंगकर्मी कुंदन सिंह का सानिध्य मिला जिनके कुशल निर्देशन में इन्होंने वहां कई नाटकों में काम किया. वे नाट्य संस्था ””””भनक”””” से भी जुड़े, जहां इन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से संबद्ध, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक मिथिलेश राय व वरिष्ठ रंगकर्मी उमेश आदित्य के सानिध्य में भी काम किया. बिहार समेत कई राज्यों में बटोरी वाहवाही पूर्णिया से अपने अभिनय का सफर तय करते हुए अमित ने भारतेंदु नाट्य अकादमी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की. उन्होंने बिहार सहित, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल के कई शहरों में अपनी कला का जौहर दिखाया है. नाट्क निर्देशक के रूप में भी इन्होंने जहां संस्कृत नाटक मृक्ष कटिकम की सफल प्रस्तुति पूर्णिया और अन्य जगहों पर की है वही हिंदी नाटक अंधेर नगरी का मंचन भारतेंदु नाट्य आदमी लखनऊ में करने के साथ पूर्णिया एवं अन्य कई शहरों में करते हुए खूब वाहवाही बटोरी. इस वर्ष जनवरी माह में द माउस ट्रैप के साथ द थ्री स्ट्रेंजर का निर्देशन भी इन्होंने किया.

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