पूर्णिया का बेलौरी शिवालय, जहां हर जलाभिषेक के साथ जुड़ती है आस्था की नई कहानी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 01 Jun 2026 8:56 AM
पूर्णिया का बेलौरी शिवालय
Aaj Ka Darshan: क्या आप जानते हैं पूर्णिया के पास एक ऐसा शिवालय भी है जहां भक्त ही पुजारी बन जाते हैं? बेलौरी का यह प्राचीन शिव मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल भी है.
पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan: पूर्णिया शहर से सटे बेलौरी स्थित शिवालय वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. माता शीतला मंदिर के सामने स्थित यह शिव धाम अपनी धार्मिक महत्ता, शांत वातावरण और अनोखी परंपराओं के कारण दूर-दराज के भक्तों को भी आकर्षित करता है. सावन हो या शिवरात्रि, यहां भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
शिवभक्ति का ऐसा धाम, जहां हर मनोकामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
बेलौरी शिवालय केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आस्था का जीवंत केंद्र है. यहां स्थापित शिवलिंग के प्रति क्षेत्र के लोगों की गहरी श्रद्धा है. स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से भगवान भोलेनाथ भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यही वजह है कि आसपास के गांवों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं.
शांति, प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम
मंदिर परिसर का वातावरण भक्तों को अलग तरह की आध्यात्मिक अनुभूति कराता है. चारों ओर हरियाली, पक्षियों की मधुर आवाज और शिवलिंग के समक्ष व्याप्त शांति श्रद्धालुओं को मानसिक सुकून देती है. कई भक्त बताते हैं कि यहां कुछ समय बिताने मात्र से मन की बेचैनी दूर हो जाती है और आत्मिक शांति का अनुभव होता है.
लोगों के सहयोग से साकार हुआ आस्था का सपना
बेलौरी शिवालय का निर्माण स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास और समर्पण का परिणाम है. वर्षों पहले क्षेत्रवासियों ने मिलकर इस मंदिर को बनाने का संकल्प लिया था. लोगों के आर्थिक और श्रम सहयोग से मंदिर का निर्माण हुआ. मंदिर में स्थापित शिवलिंग विशेष रूप से बनारस से लाया गया था, जिसकी वैदिक विधि से प्रतिष्ठा कराई गई. मंदिर निर्माण में स्व. अतुल चंद्र दास सहित कई स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
यहां भक्त ही बन जाते हैं पुजारी
इस शिवालय की सबसे खास बात यह है कि यहां नियमित रूप से कोई स्थायी पुजारी नियुक्त नहीं है. स्थानीय श्रद्धालु ही पूजा-पाठ, आरती और मंदिर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी निभाते हैं. विशेष धार्मिक अवसरों पर बाहर से विद्वान पंडितों को आमंत्रित किया जाता है. यही परंपरा इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.
सावन और शिवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धा की भीड़
श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान बेलौरी शिवालय का नजारा देखते ही बनता है. सुबह से देर रात तक जलाभिषेक, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर चलता रहता है. शिव चतुर्दशी पर भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. यही कारण है कि बेलौरी शिवालय आज भी पूर्णिया क्षेत्र में आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक एकता का मजबूत प्रतीक बना हुआ है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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