अचानक लिये निर्णय पर सवाल

Updated at : 20 Feb 2020 7:19 AM (IST)
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अचानक लिये निर्णय पर सवाल

पूर्णिया : भारतीय स्टेट बैंक के पूर्णिया स्थित आंचलिक कार्यालय कार्यालय के भागलपुर में विलय किए जाने का विरोध अब मुखर रुप से होने लगा है. बैंक प्रबंधन के इस फैसले से आहत पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस अचानक लिए गये विलय के निर्णय के औचित्य पर सवाल खड़ा कर रहा है. सभी इसे पूर्णिया के […]

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पूर्णिया : भारतीय स्टेट बैंक के पूर्णिया स्थित आंचलिक कार्यालय कार्यालय के भागलपुर में विलय किए जाने का विरोध अब मुखर रुप से होने लगा है. बैंक प्रबंधन के इस फैसले से आहत पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस अचानक लिए गये विलय के निर्णय के औचित्य पर सवाल खड़ा कर रहा है.

सभी इसे पूर्णिया के साथ नाइंसाफी बता रहे हैं. प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि आंचलिक कार्यालय पूर्णिया के लिए गौरव है और इसे समाप्त कर यह गौरव छीनने का प्रयास किया जा रहा है. मगर इसके लिए बैंक प्रबंधन को जनमानस का कड़ा विरोध और आंदोलन झेलना होगा.
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अभी हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक के मुख्यालय स्थित उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम ने आंचलिक कार्यालय, भागलपुर का विलय आंचलिक कार्यालय, पूर्णिया में करने का निर्णय लिया था क्योंकि भागलपुर आंचलिक कार्यालय के अधीन महज 32 शाखाएं कार्यरत हैं. सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधन पर इस निर्णय के कारण क्षेत्रीय एवं राजनीतिक दबाव बढ़ गया.
दबाव के प्रभाव में आकर बैंक प्रबंधन ने इस निर्णय में थोड़ा बदलाव कर पूर्णिया के आंचलिक कार्यालय का विलय भागलपुर में करने का निर्णय ले लिया जबकि पूर्णिया के अधीन 123 शाखाएं कार्यरत हैं और कार्यालय का अपना भवन के साथ अधिकारी एवं कर्मचारी के निवास हेतु 105 क्वार्टर एवं अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र है जो अपनी जमीन एवं भवन में अवस्थित है.
जानकारों ने बताया कि वर्तमान में स्टेट बैंक का आंचलिक कार्यालय पूर्णिया के अलावा भागलपुर, मुजफ्फरपुर, देवघर, धनबाद एवं रांची में अवस्थित है. लेकिन किसी भी आंचलिक कार्यालय एवं प्रशिक्षण केंद्र यथा पटना, रांची एवं देवघर के पास अपनी जमीन एवं अपना भवन तक नहीं है. सभी कार्यालय उच्च किराये के भवन में कार्यरत है.
पूर्णियावासियों का कहना है कि इस हिसाब से भी पूर्णिया के आंचलिक कार्यालय को भागलपुर ले जाने का कोई औचित्य नहीं बनता है. लोगों का यह सवाल भी है कि पूर्णिया के इस गौरव को छीनना क्या ज्यादती नहीं है. पूर्णिया के पेंशनरों और समाजसेवियों ने भी भी बैंक प्रबंधन के इस फैसले को गलत ठहराया है और कहा है कि यह निर्णय अव्यावहारिक, यथार्थ से परे एवं आर्थिक रूप से बैंक के लिए हितकर नहीं है.
कहते हैं पूर्णिया के समाजसेवी
भारतीय स्टेट बैंक की सैकड़ों करोड़ की अपनी अचल संपत्ति पूर्णिया में है. इस लिहाज से इसका भागलपुर आंचलिक कार्यालय में विलय करना कहीं से भी उचित प्रतीत नहीं होता है. यदि राजनीतिक दबाव है तो भागलपुर आंचलिक कार्यालय को भागलपुर में यथावत रहने दिया जा सकता है.
के.एन. ठाकुर, समाजसेवी
स्टेट बैंक के पूर्णिया आंचलिक कार्यालय का भागलपुर में किया जाना निश्चित रुप से गलत और अव्यावहारिक है. पूर्णिया में इसके पास अथाह सम्पत्ति तो है ही जबकि विकासशील पूर्णिया के नजरिये से देखा जाए तो यह यहां की धरोहर भी है. इस पर पुनर्विचार किए जाने की जरुरत है.
रामायण प्रसाद, समाजसेवी
पूर्णिया में आंचलिक कार्यालय अर्थात प्रशासनिक कार्यालय लगभग चालीस वर्षों से कार्यरत है और 250 वर्ष पुराने पूर्णिया जिला को गौरवान्वित करता है. इसको अन्यत्र विलय करने का निर्णय अविवेकपूर्ण और आर्थिक दृष्टिकोण से नुकसानदायक है. इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
विजय कु श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता
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