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पूर्णिया में नीचे जा रहा भू-जल स्तर

Updated at : 09 May 2019 12:50 AM (IST)
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पूर्णिया में नीचे जा रहा भू-जल स्तर

बनमनखी व धमदाहा में ज्यादा गिरावट कम बारिश और मौसम के गर्म मिजाज के कारण जल संकट के आसार यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पानी के लिए तरसेंगे पूर्णियावासी विकास वर्मा, पूर्णिया : कम बारिश और मौसम के गरमाते मिजाज के कारण पूर्णिया में जल संकट के आसार नजर आने लगे हैं. […]

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  • बनमनखी व धमदाहा में ज्यादा गिरावट
  • कम बारिश और मौसम के गर्म मिजाज के कारण जल संकट के आसार
  • यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पानी के लिए तरसेंगे पूर्णियावासी
विकास वर्मा, पूर्णिया : कम बारिश और मौसम के गरमाते मिजाज के कारण पूर्णिया में जल संकट के आसार नजर आने लगे हैं. यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पटना और गया की तरह यहां पीने के लिए भी पानी का आफत हो सकता है. तापमान बढ़ने के कारण पानी का जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है.
समझा जाता है कि आने वाले दिनों में पूर्णिया और आस पास के इलाकों में पानी के लिए कतार में खड़ा होना पड़ेगा. पूर्णिया में गुजरते वक्त के साथ ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जा रहा है. धीरे-धीरे गहरा रहे इस समस्या से खुद विभागीय अधिकारी भी चिंतित हैं. विभागीय स्तर पर इसकी रिपोर्ट भी सरकार को लगातार भेजी जा रही है.
अलबत्ता विभाग का दावा है कि शहरी क्षेत्र के भू-जल स्तर में कोई गिरावट नहीं है. लेकिन यदि गर्मी की यही रफ्तार रही और बारिश नहीं हुई तो जलस्तर में गिरावट आ सकती है. विभाग का कहना है कि भू-जल स्तर नीचे जाने के मामले में पूर्णिया ही नहीं, बिहार के 19 जिला क्रिटिकल जॉन में है. पूर्णिया के पड़ोसी जिला कटिहार व मधेपुरा जिले के कई क्षेत्रों में भी ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जाने जा रहा है.
दरअसल, मौसम में आये बदलाव और बारिश में कम होने के कारण भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है. पीएचइडी विभाग की मानें तो इस साल अब तक 6 इंच से एक फीट तक जलस्तर नीचे गया है. विभागीय जानकारों की मानें तो जिले के दो प्रखंड क्रमश: बनमनखी और धमदाहा में सबसे ज्यादा जलस्तर नीचे गया है.
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए विभागीय अधिकारी प्रत्येक सप्ताह एक प्रखंड में पांच जगहों के भू-जल स्तर की जांच कर रहे है जिसकी रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जा रही है. विभागीय जानकारों का कहना है कि जिस रफ्तार से जिले में भू-जल स्तर नीचे जा रहा है, यदि यही रफ्तार रही तो जून तक जलस्तर दो फीट तक नीचे जा सकता है.
जानकार बताते हैं कि चार साल पूर्व जहां-जहा 10 से 15 फीट तक गहराई में पानी मिल पाता था वहीं आज वहां 20 से 25 फीट तक गहराई को बोरिंग के बावजूद पानी भाग रहा है. आलम यह है कि मौसम के गर्म मिजाज के कारण न केवल ट्यूबवेल से पानी भाग रहा बल्कि बोरिंग के बावजूद पानी निकालने में मोटर फेल हो रहा है.
छह साल पूर्व भी करायी गयी थी जांच
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को तीन साल पूर्व 2012 में जल स्तर नीचे जाने के संकेत मिले थे और विभागीय स्तर पर इसकी जांच भी शुरू की गयी थी. विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता रमण जी झा ने जांचोपरांत इस बात का खुलासा किया था कि अलग-अलग इलाकों में पानी का लेयर नीचे जा रहा है.
उस समय प्रखंडवार पता किया गया था. उस रिपोर्ट की मानें तो पूर्णिया पूर्व में जलस्तर 13, बनमनखी व धमदाहा में 14 , श्रीनगर तथा केनगर प्रखंड में 12 फीट से नीचे चला गया.
कहते हैं पीएचइडी अधिकारी
जिले में लगातार कम हो रही बारिश की वजह से भू-जल स्तर नीचे गया है. जिले के बनमनखी और धमदाहा के क्षेत्रों में 6 इंच से करीब 1 फीट वाटर ग्राउंड लेवल नीचे गया है. वैसे चिंता की कोई बात नहीं है. सोमवार को हर प्रखंड के पांच जगहों के जलस्तर का जांच की जाती है. फिर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजते हैं.
इ. मनीष आनंद, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल पूर्णिया
बारिश का अनुपात कम होने से जलसंकट के आसार इसबार गर्मी भी पड़ेगी ज्यादा
पिछले कुछ सालों से जिले में बारिश का अनुपात काफी कम हो गया है जिससे जल स्तर भी नीचे जा रहा है. जानकारों ने बताया कि बदलते दौर में मौसम का मिजाज समय से पहले गर्म हो जाता है जबकि ऐसी स्थिति अमूमन जून महीने में हुआ करती थी. मार्च-अप्रैल में पहले ऐसी गर्मी भी नहीं पड़ती थी.
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2006 के बाद से लगातार बारिश कम हुई है. वर्ष 2010 से 2018 तक बारिश बहुत कम हुई है. मौसम विभाग के मुताबिक राज्य में 13 वर्षों से औसत बारिश 800 मिमी. से थोड़ी अधिक हो रही है.
जानकारों के मुताबिक डेढ़ दशक पहले राज्य में 1200 से 1500 मिमी बारिश होती थी जबकि तेरह वर्षों में 400 से 700 मिमी. तक बारिश कम हुई है. इधर, मई के पहले हफ्ते में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार गर्मी ज्यादा पड़ेगी और मानसून में बारिश कम होने की संभावना है.
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