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पूर्णिया में पप्पू यादव ने फूंका चुनावी बिगुल, पीएम मोदी से पूछे सवाल

Updated at : 09 Mar 2024 6:58 PM (IST)
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पूर्णिया में पप्पू यादव ने फूंका चुनावी बिगुल, पीएम मोदी से पूछे सवाल

पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में आयोजित रैली से पप्पू यादव ने चुनावी बिगुल फूंका. रैली में उन्होंने पूर्णिया के लोगों से कहा कि वो प्रचार करने नहीं बल्कि सेवक के तौर पर आए हैं. अपने भाषण के दौरान उन्होंने सवालिया लहजे में पीएम और सीएम पर भी निशाना साधा.

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जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शनिवार को पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में आयोजित प्रणाम पूर्णिया महारैली के माध्यम से लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका. उन्होंने पूर्णिया से अपने मां-बेटे का रिश्ता जोड़कर जता दिया कि वे हर हाल में पूर्णिया सीट से चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि पूर्णिया का विकास कोई नेता नहीं बल्कि एक बेटा ही कर सकता है. मैं वचन देता हूं कि आपका यह पुत्र मरते दम तक आपका सेवक बनकर आपकी सेवा करता रहेगा.

प्रचार करने नहीं, सेवक के तौर पर आए हैं : पप्पू यादव

पप्पू यादव ने कहा कि वह यहां लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने नहीं बल्कि कोसी-सीमांचल के लोगों के सेवक के तौर पर आये हैं. उन्होंने अपने भाषणों में एक तरफ जहां स्थानीय मुद्दों को बार-बार उठा कर लोगों के जख्म पर मलहम लगाने की कोशिश की वहीं दूसरी तरफ अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान किये गये कामों की दुहाई देकर लोगों को जोड़ने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि जब-जब हम टूटे हैं, तब-तब पूर्णिया ने अपने आंचल फैलाकर गोद में लिया है. हमें पूर्णिया ने कभी हराया नहीं है बल्कि हमेशा उन्हें गले लगाया है.

पप्पू यादव ने पीएम-सीएम से पूछा सवाल

चिलचिलाती धूप के बीच अपने 45 मिनट के अपने भाषणों में उन्होंने पीएम और सीएम को निशाने पर लिया. उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा आखिर कब तक सीमांचल का यह इलाका गरीबी और बदहाली के दौर से गुजरता रहेगा. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज अब तक क्यों नहीं मिला? बिहार में हुए हालिया सर्वे में जो बिहार खासकर सीमांचल की बदहाली की जो तस्वीर सामने आयी है, आखिर उसके लिए जिम्मेवार कौन हैं?

बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को उनका हक कब देंगे : पप्पू यादव

पप्पू यादव ने कहा कि सर्वे बताता है कि सूबे के 99 फीसदी लोगों के पास लेपटॉप और 96 फीसदी लोगों के पास साइकिल नहीं है. 82 फीसदी लोगों के घर फूस और टीन के हैं. राज्य के नौ फीसदी लोगों के पास रहने के लिए एक डिसमिल जमीन तक नहीं है. सर्वे के मुताबिक बिहार के कोसी- सीमांचल के इस इलाके की तस्वीर और भी भयावह है. आखिर इसके जिम्मेवार कौन हैं? सिस्टम या फिर नेता. उन्होंने कहा कि जाति और धर्म का खेल कर वोट लेने वाले लोग बताएं कि विकास के मुद्दे पर वह कब बात करेंगे और बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को उनका हक कब देंगे.

रैली में जन अधिकार पार्टी के बिहार भर के नेता यहां पहुंचे हुए थे. मंच पर पार्टी के स्थानीय और राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे पार्टी पदाधिकारियों को जगह दी गयी थी. मैदान में बड़ी संख्या में महिलायें पहुंची थी.

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Anand Shekhar

लेखक के बारे में

By Anand Shekhar

Dedicated digital media journalist with more than 2 years of experience in Bihar. Started journey of journalism from Prabhat Khabar and currently working as Content Writer.

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