2026 में STF ने किए 19 एनकाउंटर, 3 की मौत; आखिर क्यों भरत तिवारी मामले को उपलब्धियों की सूची से रखा बाहर?
बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 2026 में अब तक 19 एनकाउंटर किए हैं. लेकिन भरत तिवारी मामले को इसमें शामिल नहीं किया गया है. STF DIG ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर पहली बार बयान दिया है.
Bharat Tiwari Case : बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वर्ष 2026 में अब तक की अपनी कार्रवाई का ब्योरा जारी किया है. पटना पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान STF के DIG ने बताया कि इस साल अब तक STF ने कुल 19 एनकाउंटर किए हैं. इन कार्रवाइयों में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि अन्य मामलों में कई लोग घायल हुए हैं.
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भरत तिवारी मामले पर पहली बार STF का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रभात खबर की ओर से STF के DIG से भोजपुर के भरत भूषण तिवारी मामले को लेकर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या 17 जून 2026 को भोजपुर में हुई मुठभेड़ को भी STF के 19 एनकाउंटर की सूची में शामिल किया गया है.
इस पर STF DIG ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी मामले को STF की एनकाउंटर संबंधी उपलब्धियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है और इसमें न्यायिक जांच आयोग भी गठित है.
"जांच पूरी होने तक इस मामले को सूची में नहीं रखा गया"
STF DIG के मुताबिक भरत तिवारी की मौत वाला मामला अभी अंडर इन्वेस्टिगेशन है. चूंकि इस मामले में न्यायिक जांच चल रही है और यह तय होना बाकी है कि घटना को किस रूप में देखा जाएगा, इसलिए इसे STF द्वारा बताए गये एनकाउंटर के आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है.
उन्होंने कहा कि STF जिन 19 एनकाउंटर का विवरण दे रही है, उसमें भरत तिवारी मामले को शामिल नहीं किया गया है.
17 जून को भोजपुर में हुई थी भरत तिवारी की मौत
17 जून 2026 को भोजपुर जिले में STF की कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गयी थी. घटना के बाद उनके परिजनों ने इसे एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे.
मामला सामने आने के बाद इसे लेकर बिहार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी काफी चर्चा हुई. विवाद बढ़ने के बाद मामले की न्यायिक जांच शुरू करायी गयी.
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में चल रही न्यायिक जांच
भरत तिवारी की मौत के मामले में रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच करायी जा रही है. जांच का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और गोली चलने की परिस्थितियों समेत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करना है.
STF ने अब साफ कर दिया है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, इसे अपनी नियमित एनकाउंटर उपलब्धियों की सूची का हिस्सा नहीं माना जाएगा.
सरकार ने परिवार को मदद और नौकरी का भी किया ऐलान
भरत तिवारी मामले को लेकर बिहार सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी देने की बात भी सामने आ चुकी है. वहीं न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर अब सभी की नजरें टिकी हैं.
19 एनकाउंटर का आंकड़ा, लेकिन भरत तिवारी केस अलग
STF के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि 2026 में बताए गये 19 एनकाउंटर के आंकड़े में भरत तिवारी की मौत शामिल नहीं है. STF का कहना है कि न्यायिक जांच पूरी होने तक इस मामले को अलग रखा गया है. अब सवाल यह है कि न्यायिक जांच की रिपोर्ट में घटना को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है.
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