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अदालत ने माना, सुशांत सिंह राजपूत प्रतिभाशाली कलाकार थे, कहा- जांच अधिकारी को कोरेंटिन करना अच्छा संदेश नहीं

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
सुशांत सिंह राजपूत
सुशांत सिंह राजपूत
FILE PIC

नयी दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि मामले को लेकर बिहार सरकार के सीबीआई जांच के अनुरोध को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सुशांत प्रतिभाशाली कलाकार थे. साथ ही बिहार के जांच अधिकारी को कोरेंटिन करने को लेकर कहा कि बिहार को अच्छा संदेश नहीं गया. मालूम हो कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में बिहार में दर्ज प्राथमिकी को मुंबई स्थानांतरित करने को लेकर गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की दायर याचिका पर सुनवाई हो रही थी.

न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपील करते हुए अदालत को बताया कि केंद्र ने मामले की सीबीआई जांच के लिए बिहार सरकार की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है. गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की ओर से अपील करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि "हम आशंकित थे. क्योंकि, बिहार से चार सदस्यीय पुलिस दल मुंबई पहुंच कर मदद मांगी थी. पुलिस आयुक्त का कहना है कि 56 बयान पहले ही दर्ज किये जा चुके हैं.''

सॉलिसिटर जनरल की अपील के मद्देनजर जस्टिस रॉय ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत एक प्रतिभाशाली कलाकार थे. उनका असामान्य परिस्थितियों में निधन हो गया. अब क्या इसमें आपराधिकता शामिल है. इसकी जांच की जानी चाहिए. अब हर किसी के पास हाई प्रोफाइल मामलों के बारे में एक राय है, लेकिन हम कानून के अनुसार आग बढ़ेंगे. इसके बाद रिया चक्रवर्ती के अधिवक्ता ने अपनी मुवक्किल के लिए सुरक्षा की मांग की. इस पर सुशांत सिंह राजपूत के परिजनों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने विरोध दर्ज कराया.

उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई आदेश नहीं दिया जाना चाहिए. क्योंकि, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जायेगी. साथ ही बिहार पुलिस की जांच के घटनाक्रम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मामले में साक्ष्य नष्ट किये जा रहे हैं. बिहार के जांच अधिकारी कोरेंटिन कर दिया गया. यह अविश्वसनीय है. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बिहार सरकार की ओर से अपील करते हुए कहा कि मामले को अगले सप्ताह के लिए अधिसूचित कर दिया जाये. वहीं, अधिवक्ता विकास सिंह ने भी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सुनवाई की मांग की.

इस पर जस्टिस रॉय ने कहा कि मैंने सीआरपीसी के एफआईआर और प्रासंगिक प्रावधानों को पढ़ा है. मुझे पता है कि मुझे क्या करना चाहिए. वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पटना पुलिस की कार्रवाई का कोई कारण नहीं है. पटना में कुछ भी नहीं हुआ है. यह एक राजनीतिक मामला है. इस पर अदालत ने पूछा कि क्या मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज किये गये अप्राकृतिक मौत के मामले में सभी पहलुओं को शामिल किया गया था. साथ ही कहा कि कोरेंटिन किया जाना बिहार पुलिस से तालमेल का अच्छा संदेश नहीं देता है. खास कर तब, जब मामले ने मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है. महाराष्ट्र सरकार को सुनिश्चित करना है कि सब कुछ पेशेवर तरीके से किया जाये. इस पर अधिवक्ता बसंत ने कहा कि मुंबई पुलिस अपना काम कर रही है.

सॉलिसीटर जनरल मेहता ने कहा कि एक पक्ष चाहता है कि मुंबई पुलिस जांच करे और अन्य बिहार पुलिस चाहती है. यहां, केंद्र जांच करना चाहता है, ताकि कोई सबूत नष्ट ना हो. इस पर रोहतगी ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता बसंत को सुनने से प्रतीत होता है कि वह याचिकाकर्ता के लिए बहस कर रहे हैं. अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि सीआरपीसी 174 के मुताबिक, यह स्पष्ट है कि पटना पुलिस ही सिर्फ जांच कर सकती है. मुंबई पुलिस ने नहीं. मुंबई में कोई भी संज्ञेय मामला दर्ज नहीं किया गया है.

अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पूरे बॉलीवुड फिल्म जगत को मुंबई पुलिस द्वारा पूछताछ और रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया गया है. लेकिन, जिस व्यक्ति ने सुशांत सिंह राजपूत के शरीर को छत के पंखे से नीचे कर दिया, उसे हैदराबाद जाने की अनुमति दी गयी.

सॉलिसीटर जनरल मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह मामले में यूनियन ऑफ इंडिया को एक पार्टी के रूप में जोड़े. इस पर अदालत ने केंद्र से कहा कि वह एक याचिका दायर करे. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाये गये हैं. उसने मामले को पटना से मुंबई स्थानांतरित करने के लिए आवेदन दिया है. बिहार पुलिस ने पहले ही सीबीआई को जांच सौंप दी है.

इस पर सॉलिसीटर जनरल मेहता ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से केंद्र ने सीबीआई जांच के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है. इसके आद अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को मुंबई पुलिस की जांच की स्थिति की अद्यतन करने के लिए निर्देशित किया. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी.

मालूम हो कि अभिनेत्री व सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने उनके खिलाफ पटना में दर्ज मामले को मुंबई स्थानांतरित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. दायर याचिका में कहा गया है कि पटना में प्राथमिकी में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ आत्महत्या के आरोपों को खत्म करने का आरोप लगाया गया है, लेकिन यह बिहार सरकार और सुशांत सिंह राजपूत के पिता के बीच 'मिलीभगत' के अलावा कुछ नहीं है.

Posted By : Kaushal Kishor

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