आर्यभट्ट के नाम पर विवि, इसलिए ज्ञान और शोध में हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है: कुलपति

Updated at : 04 Mar 2025 2:54 AM (IST)
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आर्यभट्ट के नाम पर विवि, इसलिए ज्ञान और शोध में हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है: कुलपति

एकेयू व एआइयू के सहयोग से भारतीय ज्ञान प्रणाली पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का हुआ उद्घाटन

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-एकेयू व एआइयू के सहयोग से भारतीय ज्ञान प्रणाली पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का हुआ उद्घाटन

संवाददाता, पटना

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू) और भारतीय विश्वविद्यालय संघ की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली पर पांच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन सोमवार को हुआ. इसका उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो शरद कुमार यादव ने कहा कि भारत सदियों से ज्ञान का उद्गम स्थल रहा है, जिसने दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, कला, भाषा, विज्ञान और शासन में अहम योगदान दिया है. उपनिषदों और वैदिक ग्रंथों से लेकर आर्यभट्ट की गणितीय प्रतिभा, आयुर्वेद में चरक की उन्नति और पाणिनि की भाषाई महारथ तक, भारतीय ज्ञान परंपराओं ने उल्लेखनीय तरीकों से वैश्विक सोच को आकार दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि हमारे विवि का नाम भी महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया है, इसलिए यह सुनिश्चित करने की हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि उनके जैसे महापुरुषों का ज्ञान नष्ट न हो. इस मौके पर भारतीय विश्वविद्यालय संघ की संयुक्त सचिव रंजना परिहार ने कहा कि देश में स्थापित 43 शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास केंद्र में आर्यभट्ट ज्ञान विवि में स्थापित केंद्र भी शामिल है और इसके द्वारा अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप श्रेष्ठ कार्य किया जा रहा है.

आधुनिक शिक्षा प्रणाली में एकीकृत करने की आवश्यकता है:

भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित इस पांच दिवसीय एफडीपी के पहले सत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार, गया के स्कूल ऑफ सोशल साइंस एंड पॉलिसी के डॉ हरेश नारायण पांडेय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित प्राचीन ग्रंथ और साहित्य विषय पर व्याख्यान दिया. कार्यक्रम की संयोजक डॉ मनीषा प्रकाश ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज तेजी से विकसित हो रहे शैक्षणिक और तकनीकी परिदृश्य में, भारतीय ज्ञान प्रणाली को फिर से खोजने, पुनर्व्याख्या करने और हमारी आधुनिक शिक्षा प्रणाली में एकीकृत करने की आवश्यकता है. भारत सदा से ज्ञान का केंद्र रहा है. इतिहास साक्षी है कि भारत के ज्ञान का प्रयोग हर क्षेत्र में हुआ चाहे वो कला या विज्ञान का क्षेत्र हो या दर्शन का. भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़े बहुत गहरी हैं.

आने वाले सत्रों में अनेक विषय विशेषज्ञ करेंगे मार्गदर्शन:

आने वाले सत्रों में चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन की अकादमिक निदेशक प्रो गौरी माहुलिकर, पीयू के पूर्व कुलपति प्रो रास बिहार प्रसाद सिंह, सीआइएमपी के निदेशक प्रो राणा सिंह, डीयू शिक्षा विभाग के प्रो प्रवीण कुमार तिवारी, एकेयू के शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के पूर्व डीन डॉ ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि के संस्कृत, पाली एवं प्राकृत विभाग के डॉ कुलदीप कुमार भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित अन्य विषयों पर व्याख्यान देंगे. देश भर के शिक्षण संस्थानों से संकाय सदस्य इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं.

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