पटना: MLA बनने के बाद इस आवास में रहेंगे प्रशांत किशोर, जानिए किसके बने पड़ोसी

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प्रशांत किशोर का नया आवास

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बांकीपुर उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद प्रशांत किशोर का नया ठिकाना पटना का MLA आवास है. खास बात यह है जिस प्रशांत किशोर को राम कृपाल यादव नहीं जानते थे अब वह उनके ही पडोसी बन गए है. बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय का संकेत है.

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Prashant Kishor New Aawas : पटना. बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों ने बिहार की राजनीति में नया संदेश दे दिया है. करीब तीन दशकों से भाजपा का किला माने जाने वाला बांकीपुर अब प्रशांत किशोर के नाम हो गया है. चुनाव जीतने के बाद अब उनका ठिकाना भी बदल गया है और वे पटना के विधायक आवास में रहने जा रहे हैं. यह सिर्फ आवास बदलने की बात नहीं, बल्कि राजधानी की सियासत में एक नए के उभरने का संकेत माना जा रहा है.

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बांकीपुर सीट लंबे समय तक भाजपा के दिग्गज नेता और राज्यसभा सदस्य नितिन नवीन के कब्जे में रही. लेकिन उनके राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद सीट खाली हुई और उपचुनाव हुआ. इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने पूरी रणनीति के साथ एंट्री ली और भाजपा को सीधे चुनौती दे दी.

मंत्री राम कृपाल यादव के बने पड़ोसी

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि उनके ठीक बगल में केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव का आवास है. चुनाव प्रचार के दौरान राम कृपाल यादव ने बयान दिया था कि वे प्रशांत किशोर को नहीं जानते. अब हालात ऐसे हैं कि दोनों नेता एक ही परिसर में पड़ोसी बन गए हैं. इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हैं.

MLA आवास बना नया राजनीतिक केंद्र

विधायक बनने के बाद अब प्रशांत किशोर का नया ठिकाना पटना का एमएलए आवास होगा. खास बात यह है कि उनके आसपास कई बड़े नेता भी रहते हैं. दीघा विधायक संजीव चौरसिया, कुम्हरार, पटना साहिब और फतुहा के विधायक उनके पड़ोसी होंगे.

30 दिन में बदल गया पूरा समीकरण

चुनाव प्रचार के दौरान ही साफ हो गया था कि इस बार मुकाबला आसान नहीं होगा. प्रशांत किशोर ने जमीन पर उतरकर जिस तरह अभियान चलाया, उसने पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति को झटका दिया. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने करीब 19 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर ली.

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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह जीत सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है. यह भाजपा के उस मजबूत गढ़ में सेंध है, जिसे अजेय माना जाता था. महज 30 दिनों में चुनावी समीकरण बदल देना प्रशांत किशोर की रणनीतिक पकड़ को भी दिखाता है.

बिहार की राजनीति में नए संकेत

बांकीपुर की यह जीत कई मायनों में अहम मानी जा रही है. एक तरफ यह भाजपा के लिए चेतावनी है, तो दूसरी तरफ विपक्षी राजनीति के लिए नया उत्साह भी. प्रशांत किशोर की एंट्री को अब सिर्फ रणनीतिकार के तौर पर नहीं, बल्कि सक्रिय नेता के रूप में देखा जा रहा है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जीत आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संकेत दे रही है कि अगर रणनीति मजबूत हो और जमीन पर पकड़ हो, तो पुराने गढ़ भी ढह सकते हैं.

फिलहाल, बांकीपुर से शुरू हुई यह सियासी कहानी अब पटना के एमएलए आवास तक पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में यही ठिकाना बिहार की राजनीति में कई नई रणनीतियों और फैसलों का गवाह बन सकता है.

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