6 जनवरी को कॉल कर बोली- मम्मी अंडा बनाकर खाऊंगी, फिर 3 घंटे बाद आई मौत की खबर

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 19 Jan 2026 6:17 PM

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सांकेतिक फोटो

Patna Hostel Case: पटना के गांधी मैदान स्थित हॉस्टल में औरंगाबाद की छात्रा अनामिका की संदिग्ध मौत ने हड़कंप मचा दिया है. परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन और दो युवकों पर साजिशन हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है. सीसीटीवी फुटेज और सुरक्षा में चूक के दावों ने इस मामले को और उलझा दिया है.

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Patna Hostel Case, मणिकांत पांडेय: छह जनवरी को जहानाबाद की नीट की छात्रा की पटना में हुई हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि औरंगाबाद जिले के गोह की एक बेटी की पटना के ही हास्टल में संदिग्ध मौत हो गयी है़ पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र स्थित परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही 15 वर्षीय छात्रा अनामिका गुप्ता उर्फ लक्ष्मी कुमारी की हत्या कराने का आरोप परिजन लगा रहे हैं.

इस संबंध में छात्रा के पिता धर्मेंद्र कुमार ने पटना गांधी मैदान थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसमें पूर्णिया जिले के वाइसी थाना क्षेत्र के चोचा गांव निवासी शमशुज जोहा के पुत्र मुसाहिद रेजा, पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के डालकोला थाना अंतर्गत दायतन निवासी गुलाम एजदानी के पुत्र मुकर्रम रेजा के साथ-साथ हॉस्टल के संचालक विशाल अग्रवाल, रंजीत मिश्रा, वार्डन खुशबू कुमारी सहित कुछ अन्य अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया है. घटना के बाद परिजन सदमे में हैं. परिजनों ने घटना को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए साजिशन हत्या करने का आरोप लगाया है.

30 दिसंबर को घर आयी थी अनामिका

परिजनों ने बताया कि अनामिका 30 दिसंबर को पटना से माता-पिता के पास दाउदनगर आयी थी. उसके दादा-दादी गोह में रहते हैं, जहां वह उनसे भी मिली थी. परिवार के लोगों का कहना है कि इस दौरान अनामिका पूरी तरह सामान्य थी, हंस-बोल रही थी और भविष्य को लेकर उत्साहित थी. उसने कहीं भी किसी तरह की परेशानी, डर या मानसिक तनाव का जिक्र नहीं किया.

तीन जनवरी को परिवार साथ गयी पटना, फिल्म देखकर लौटी थी खुश

तीन जनवरी को पूरा परिवार पटना गया. इस दौरान अनामिका अपने मौसा शनि कुमार, मौसी सुमन कुमारी, दोनों भाइयों आयुष राज व आदित्य राज, बहन अनुष्का और माता-पिता के साथ शाम साढ़े सात बजे से साढ़े 10 बजे तक सिनेमा हॉल में फिल्म देखने गयी थी. इसके बाद सभी लोग गोला रोड स्थित मौसी के घर ठहरे. परिजनों का कहना है कि उस दिन भी अनामिका बेहद खुश थी और परिवार के साथ समय बिताकर संतुष्ट नजर आ रही थी.

चार जनवरी को मां ने खुद छोड़ा हॉस्टल, पांच तक बातचीत सामान्य

चार जनवरी को अनामिका को उसकी मां खुद परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल पहुंचाकर आयी थीं. उस समय मां-बेटी के बीच काफी देर तक बातचीत हुई. पांच जनवरी को भी फोन पर बातचीत सामान्य रही. परिवार का कहना है कि उस दौरान अनामिका के व्यवहार में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे यह अंदेशा हो कि वह किसी दबाव या परेशानी में थी.

छह जनवरी की सुबह आखिरी बातचीत, भविष्य की बातें कर रही थी बेटी

छह जनवरी की सुबह करीब साढ़े नौ बजे अनामिका की अपनी मां से आखिरी बातचीत हुई थी. उसने कहा था कि वह बाथरूम जा रही है, फिर अंडा बनाकर खायेगी. बातचीत के दौरान उसने यह भी कहा कि जब मम्मी पटना से वापस घर जाएंगी तो उससे मिलकर जाएं. मां ने भी हामी भरी थी. परिजनों का कहना है कि उस बातचीत में अनामिका पूरी तरह सहज और भविष्य को लेकर बात कर रही थी.

दोपहर एक बजे आया फोन- बेटी ने सुसाइड कर लिया

परिजनों के अनुसार छह जनवरी की दोपहर करीब एक बजे अचानक हॉस्टल प्रबंधन की ओर से फोन आया कि अनामिका ने आत्महत्या कर ली है. यह खबर सुनते ही मां बदहवास हालत में हॉस्टल पहुंचीं, लेकिन वहां न तो बेटी मिली और न ही उसका शव. हॉस्टल प्रबंधन ने बताया कि उसे पीएमसीएच भेजा गया है.

पीएमसीएच में भी कई घंटे तक नहीं मिला शव

परिजनों का आरोप है कि जब वे पीएमसीएच पहुंचे तो कई घंटों तक शव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी. इमरजेंसी वार्ड में काफी देर बाद एक बेड पर अनामिका का शव पड़ा मिला. परिजनों का कहना है कि शव की स्थिति देखकर उन्हें यकीन हो गया कि मामला संदिग्ध है.

सीसीटीवी फुटेज और शरीर के निशान पर सवाल

परिजनों का दावा है कि जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, उसमें अनामिका को पंखे के एक हिस्से से लटकाया हुआ दिखाया गया है, जबकि उसके पैर नीचे चौकी के पास थे. इसके अलावे गले पर कपड़े के फंदे के बजाय किसी अन्य रस्सी के निशान दिखाई देने की बात कही जा रही है. परिजनों का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश को दर्शाता है.

पिता का दर्द-बेटी बनना चाहती थी डॉक्टर

मृतका के पिता धर्मेंद्र कुमार, जिनका दाउदनगर में फल का आढ़त है और जो पत्नी सीमा देवी के साथ वहीं रहते हैं, ने कहा कि उनकी बेटी का सपना डॉक्टर बनने का था. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को दरिंदों ने सुनियोजित साजिश के तहत मौत के घाट उतार दिया. चाचा जितेंद्र कुमार ने कहा कि अनामिका बेहद सीधी-सादी थी. उसकी हत्या कर उसे फंदे से लटकाया गया और समय रहते न तो परिजनों को और न ही प्रशासन को सही सूचना दी गयी.

परिवार में कोहराम, नानी-दादी का रो-रोकर बुरा हाल

अनामिका की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है. नानी मंजू देवी, दादी श्याम सुंदर देवी समेत सभी परिजन सदमे में हैं. घर के बाहर सन्नाटा है और हर आंख नम है. परिजन लगातार न्याय की गुहार लगा रहे है.

जांच की मांग, छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल

परिजनों ने सरकार और प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आयेगी, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा. जहानाबाद की नीट छात्रा के बाद गोह की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पढ़ाई के लिए घर से दूर रहने वाली बेटियां आखिर कितनी सुरक्षित हैं.

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पैरेंट्स को अंदर नहीं जाने देते, फिर दो लड़के हॉस्टल में कैसे पहुंचे?

हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं. मृतका की मां का आरोप है कि जब भी अभिभावक अपनी बच्ची से मिलने आते हैं, तो उन्हें हॉस्टल के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता, बल्कि ऑफिस में बैठाकर बच्ची को वहीं बुलाया जाता है. इसके बावजूद मिले सीसीटीवी फुटेज में दो युवकों को छात्रा के कमरे में पंखे से शव उतारते हुए देखा गया है.

मां का कहना है कि यदि हॉस्टल के नियम इतने सख्त हैं, तो फिर बाहरी युवक अंदर तक कैसे पहुंचे. परिजनों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए सीसीटीवी फुटेज और हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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