पटना में जमीन खरीदना हुआ महंगा, लागू हुआ नया सर्किल रेट, बोरिंग रोड और गांधी मैदान में 2.5 करोड़ रुपये कट्ठा

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Patna New Circle Rate: पटना में जमीन खरीदने और रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ा अपडेट है. जिला प्रशासन ने नया सर्किल रेट लागू कर दिया है, जिसके बाद बोरिंग रोड, गांधी मैदान और डाकबंगला जैसे इलाकों में जमीन की सरकारी कीमत 2.5 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच गई है. नई दरों का सीधा असर रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क पर पड़ेगा.

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Patna New Circle Rate: पटना में जमीन रजिस्ट्री के लिए नया सर्किल रेट (एमवीआर) लागू कर दिया गया है. जिला प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए जमीनों की सरकारी कीमतों में बढ़ोतरी की है. नई दरें शुक्रवार से प्रभावी हो गई हैं. अब पटना के कई प्रमुख इलाकों में जमीन खरीदने पर लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क देना होगा.

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सात कैटेगरी में बांटी गई जमीन

नई व्यवस्था के तहत जमीनों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें आवासीय, व्यावसायिक, मिश्रित उपयोग, कृषि, औद्योगिक और अन्य श्रेणियां शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि अब जमीन के वास्तविक उपयोग के आधार पर मूल्य तय होगा. इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.

गांधी मैदान और बोरिंग रोड सबसे महंगे

नई दरों के अनुसार गांधी मैदान, बोरिंग रोड, डाकबंगला, फ्रेजर रोड और एग्जीबिशन रोड पटना के सबसे महंगे इलाके बन गए हैं. इन क्षेत्रों में प्रति कट्ठा जमीन का न्यूनतम बाजार मूल्य बढ़कर 2.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों और ऊंची मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

इन इलाकों में भी जमीन की कीमतों में बड़ा उछाल

पटना के कई अन्य इलाकों में भी जमीन की सरकारी कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं.

  • राजाबाजार- 1.85 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • सगुना मोड़- 1.62 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • पाटलिपुत्र कॉलोनी- 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • कंकड़बाग- 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • मीठापुर- 1.85 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • सचिवालय क्षेत्र- 1.85 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • आर ब्लॉक- 1.85 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • लालजी टोला- 2.18 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा
  • कदमकुआं- 1.85 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा

पुराने बाइपास और विकसित हो रहे इलाकों को भी झटका

पुराने बाइपास और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी एमवीआर बढ़ाया गया है. इसका सीधा असर जमीन खरीदने वालों पर पड़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में पहले से चल रही ऊंची कीमतों को अब सरकारी दरों में भी शामिल कर लिया गया है.

शहरी जमीन को छह कैटेगरी में बांटा गया

राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों की जमीन को छह अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया है. इसमें मुख्य सड़क की व्यावसायिक और आवासीय भूमि, शाखा सड़क, औद्योगिक भूमि, गलीनुमा सड़क की भूमि और कृषि भूमि शामिल हैं. वहीं ग्रामीण इलाकों में जमीन को व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय, सिंचित, असिंचित और बलुआही श्रेणियों में बांटा गया है.

स्टांप शुल्क में क्या है नया नियम?

नई अधिसूचना के अनुसार सामान्य मामलों में जमीन रजिस्ट्री पर 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना होगा. अगर कोई पुरुष किसी महिला के नाम संपत्ति रजिस्ट्री करता है, तो स्टांप शुल्क 6.6 प्रतिशत लगेगा. यानी 0.4 प्रतिशत की छूट मिलेगी. दान के मामलों में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी.

रजिस्ट्री कराने वालों पर बढ़ेगा खर्च

नई एमवीआर दरें लागू होने के बाद पटना में जमीन खरीदना और महंगा हो जाएगा. खासकर प्राइम लोकेशन वाले इलाकों में रजिस्ट्री कराने के लिए अब लोगों को पहले से कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.

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