पटना बेऊर जेल में सस्पेंड 5 अफसरों पर FIR, बिना अनुमति जेल में घुसकर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप
सांकेतिक तस्वीर
पटना की बेउर जेल में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, जब निलंबित अधिकारी बिना रोक-टोक अंदर घुस गए. इस मामले में जेल उपाधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और चार जेल गार्डों को निलंबित कर दिया गया है. गोपनीय फाइलों से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच अब पुलिस करेगी.
Patna Beur Jail : पटना के बेउर जेल में नियमों की खुलेआम अनदेखी और साक्ष्य से छेड़छाड़ के गंभीर मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. जेल के अंदर निलंबित अधिकारियों के लगातार प्रवेश और गोपनीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ की जानकारी सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है. इस मामले में बेउर जेल के उपाधीक्षक सुधीर शर्मा को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है, जबकि चार जेल गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निलंबित अधिकारियों को बिना किसी जांच-पड़ताल के जेल परिसर में प्रवेश करने दिया गया. इस गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत को देखते हुए कक्षपाल संजीव कुमार गुप्ता, धीरज कुमार, उमेश कुमार और अजय जॉन मरांडी को सस्पेंड कर दिया गया है. प्रशासन का मानना है कि इनकी भूमिका संदिग्ध रही है.
उपाधीक्षक से मांगा गया जवाब
इस पूरे मामले में उपाधीक्षक सुधीर शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं. उन्हें जारी शोकॉज नोटिस में पूछा गया है कि जब निलंबित अधिकारी जेल के अंदर आकर साक्ष्य मिटा रहे थे, तो उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई. साथ ही यह भी पूछा गया है कि उन्होंने समय रहते इस मामले की सूचना अपने वरीय अधिकारियों को क्यों नहीं दी.
सूत्रों के अनुसार, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तेज की जा सकती है. उनके निलंबन की संभावना भी जताई जा रही है.
Patna News: गोपनीय फाइलों से छेड़छाड़ का आरोप
जांच में यह बात सामने आई है कि पांच निलंबित जेल अधिकारी लगातार तीन से चार दिनों तक बेउर जेल में अनधिकृत रूप से आते-जाते रहे. इनमें उपाधीक्षक अजय कुमार, सहायक अधीक्षक अभिषेक कुमार, मनीष कुमार ठाकुर, शालिनी और कुंदन कुमारी शामिल हैं.
बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों ने जेल के अंदर जाकर गोपनीय फाइलों को खंगाला और कई जरूरी दस्तावेजों को फाड़ दिया. इतना ही नहीं, कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को भी नष्ट करने का आरोप लगा है. इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया.
मामला दर्ज, पुलिस करेगी पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 जुलाई को पांचों आरोपित अधिकारियों के खिलाफ बेउर थाना में केस दर्ज कराया गया था. अब पुलिस इन सभी को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर किसकी शह पर निलंबित अधिकारियों को जेल में प्रवेश मिला और उन्होंने किन-किन साक्ष्यों को नष्ट किया.
अन्य जिलों के अधीक्षकों पर भी कार्रवाई की तैयारी
इस मामले की आंच अब अन्य जिलों तक भी पहुंच गई है. शिवहर, सुपौल और कटिहार जेल के अधीक्षकों को भी शोकॉज नोटिस जारी किया गया है. बताया जा रहा है कि निलंबित अधिकारियों की तैनाती इन जिलों में ही थी.
प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है. साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो. इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
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