BJP MLA के बेटे को नियम के विरुद्ध केन्द्र सरकार का वकील बनाए जाने पर हाई कोर्ट में चुनौती

Updated at : 09 Sep 2021 7:44 PM (IST)
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BJP MLA के बेटे को नियम के विरुद्ध केन्द्र सरकार का वकील बनाए जाने पर हाई कोर्ट में चुनौती

नियमों की अनदेखी कर राजधानी पटना के कुम्भरार विधान सभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अरुण कुमार सिंह के पुत्र आशीष कुमार सिन्हा को पटना हाई कोर्ट में केन्द्र सरकार का वकील नियुक्त किए जाने संबंधी केन्द्रीय विधि एवम न्याय मंत्रालय के आदेश को हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर चुनौती दी गई है.

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पटना. नियमों की अनदेखी कर राजधानी पटना के कुम्भरार विधान सभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अरुण कुमार सिंह के पुत्र आशीष कुमार सिन्हा को पटना हाई कोर्ट में केन्द्र सरकार का वकील नियुक्त किए जाने संबंधी केन्द्रीय विधि एवम न्याय मंत्रालय के आदेश को हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर चुनौती दी गई है.

हाई कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश उर्फ दिनेश कुमार उर्फ दिनेश सिंह ने गुरुवार को पटना हाई कोर्ट याचिका दायर कर आशीष के नियुक्ति को चुनौती दी है. हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता ने आशीष की नियुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार के विधि एवम न्याय मंत्रालय द्वारा विगत 21 जनवरी, 2021 को जारी किये गए आदेश /पत्र को रद्द करने का आग्रह कोर्ट से किया है.

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि यह नियुक्ति पटना हाई कोर्ट के खण्डपीठ द्वारा दिनेश बनाम केंद्र सरकार व अन्य के मामले में दिये गए आदेश व भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 में दी गई परिभाषा के अनुरूप नहीं की गई है. नियुक्ति के पूर्व हाई कोर्ट से परामर्श लेने की बात हाई कोर्ट द्वारा दिये गए फैसले में कहा गया है. याचिका में कहा गया है कि अधिवक्ता आशीष पटना हाई कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड भी नही हैं और उनके पास इस पद पर नियुक्ति के लिए पर्याप्त अनुभव भी नही है .बावजूद इनकी नियुक्ति हाई कोर्ट में सेन्ट्रल गवर्नमेंट कॉउन्सिल के पद पर की गई है.

याचिका में कहा गया है कि करदाताओं के पैसों का इस्तेमाल किसी को भी कही से वकील नियुक्त करने के लिए नहीं किया जा सकता है. उक्त नियुक्ति से पक्षपात की बू आती है क्योंकि आशीष सिन्हा भाजपा विधायक के लड़के हैं और तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के स्वजातीय लाला कायस्थ जाति के हैं.

आशीष सिन्हा के पिता अरुण सिन्हा और तत्कालीन केन्द्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद एक ही राजनैतिक पार्टी से आते हैं. याचिकाकर्ता ने अपने याचिका में यह आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के वकील के तौर पर श्री सिन्हा की नियुक्ति मनमाने ढंग से भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हुए किया गया है इसलिये इसे निरस्त किया जाय.

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