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बाल मजदूरों की खोज में घर-घर दस्तक देंगे अधिकारी

Updated at : 18 Apr 2025 7:23 PM (IST)
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बाल मजदूरों की खोज में घर-घर दस्तक देंगे अधिकारी

बाल मजदूरों की खोज में घर-घर दस्तक देंगे अधिकारी

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प्रहलाद कुमार

बिहार में बाल श्रम उन्मूलन कार्यक्रम के तहत श्रम संसाधन विभाग ने निर्णय लिया है कि घरों में बाल श्रम कराने वालों पर कार्रवाई किया जायेगा. विभागीय समीक्षा में इसका खुलासा हुआ है कि दुकानों, कारखानों और कबारियों से अधिक घरों में बाल श्रम कराया जा रहा है. जिसमें लड़कियों की संख्या अधिक है. विभाग ने समाज कल्याण विभाग के सहयोग से सभी जिलों में अभियान चलाया जायेगा और घरों में बच्चों से काम कराने वाले घर मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी, जिसकी शुरुआत शहरों से होगी.शहरी क्षेत्रों में बने घरों में अधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण भी करेंगे. इसके लिए टीम बनाकर जिला प्रशासन से भी सहयोग लिया जायेगा.

स्कूल के समय बच्चों से काम कराने वाले होंगे चिन्हित

श्रम संसाधन विभाग ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि स्कूल के समय अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चे को अपने ही व्यवसाय में जोड़कर काम करा रहे हैं,तो ऐसे व्यक्ति को चिन्हित करें. वहीं, उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई भी करें. इसको लेकर विभाग ने पूर्व में भी एक बैठक कर निर्देश दिया था, लेकिन उसका पालन करने में अधिकारियों ने ढील दे दी. उसी आदेश की समीक्षा के बाद फिर से सभी जिलों में तैनात अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूल के समय बच्चे स्कूल में रहें. इसे सुनिश्चित करें. इस अभियान में शिक्षा विभाग से भी सहयोग लिया जाये.

शहरों में रहने वाले गांव से भी लड़कियों को घरों में रखकर कराते हैं काम

बंधुआ मजदूरी कराने पर सख्त नियम हैं. वहीं, विभाग का भी मानना है कि बंधुआ मजदूरी अब नहीं कराया जाता है. शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग गांव से 14 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को लाकर घरों का काम कराते है.इस काम के एवज में उसे पैसा और रहने के लिए थोड़ी सी जगह मिलती हैं और इन्हें 24 घंटे काम करना पड़ता है. नहीं करने पर इन्हें मारा-पीटा भी जाता है.

यह है नियम

बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन आधि नियम 1986 की धारा 14 के अनुसार बाल श्रम करवाने वाले नियोक्ता को तीन माह से एक वर्ष तक का कारावास या 10 हजार से 20 हजार तक का जुर्माने लगाने का प्रावधान है. विभाग के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के बच्चों से घरों में काम कराने के एवज में पैसा दिया जा रहा है, इसे बाल श्रम कहा जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Mithilesh kumar

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By Mithilesh kumar

Mithilesh kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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