अब तेज प्रताप को सियासी ‘लू’ खुद झेलनी पड़ेगी

राजद से निष्कासित हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक तेज प्रताप यादव के सिर से लालू प्रसाद नाम की सियासी छतरी अब पूरी तरह हट चुकी है.
तेज प्रताप के मौन का टूटना अभी बाकी
संवाददाता,पटना
राजद से निष्कासित हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक तेज प्रताप यादव के सिर से लालू प्रसाद नाम की सियासी छतरी अब पूरी तरह हट चुकी है. ऐसे में तेज प्रताप को सियासी ‘लू’ उन्हें खुद ही झेलनी पड़ पड़ सकती है. उनके सियासी कैरियर पर सबसे बड़ा खतरा उनके फिर से ””””माननीय”””” बनने पर है. यह करीब-करीब तय है कि विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी उन्हें टिकट देने नहीं जा रही है. फिलहाल तेज प्रताप का मौन टूटने के बाद तय होगा कि उनका भविष्य का प्लान क्या-क्या है?
फेसबुक पोस्ट कांड के बाद तेज प्रताप ने अभी चुप्पी साध रखी है. एक पोस्ट ने उनके सियासी कैरियर को पूरी तरह दांव पर लगा दिया है. हैरत की बात है कि विवादास्पद घटनाक्रम के 60 घंटे बाद उनके समर्थन में उनके अपने छात्र संगठन ने भी चुप्पी साध रखी है. जानकारों के अनुसार लालू प्रसाद के एक ट्वीट से हिचकोले खा रहे तेज प्रताप के सियासी कैरियर को बचाने राजद का ही एक वर्ग सक्रिय हो सकता है. राजद में एक ऐसा भी वर्ग है, जिसका मानना है कि तेज प्रताप यादव को छह साल का निष्कासन की सजा गुनाह से बहुत बड़ी है. इसमें कुछ कमी की जानी चाहिए.
तेज प्रताप यादव ने पहला चुनाव साल 2015 में वैशाली की महुआ सीट और 2020 में उन्होंने सीट बदल कर हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीता. राजद की राजनीति में तेज प्रताप खुद को ””””किंगमेकर”””” बताते हुए कई मौकों पर कह
चुके हैं, कि तेजस्वी अर्जुन हैं और मैं उनका सारथी कृष्ण. तेज प्रताप की इस गर्वोक्ति की परीक्षा होनी भी बाकी है.
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