ePaper

नये सत्र से विवि व कॉलेजों में अनिवार्य होगी पर्यावरण की पढ़ाई

Updated at : 02 Jan 2026 8:17 PM (IST)
विज्ञापन
नये सत्र से विवि व कॉलेजों में अनिवार्य होगी पर्यावरण की पढ़ाई

बदलते पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से हो रहे दोहन को देखते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है.

विज्ञापन

-यूजीसी ने दिया निर्देश, सिलेबस अपने स्तर से तैयार कर सकते हैं विश्वविद्यालय

संवाददाता, पटना

बदलते पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से हो रहे दोहन को देखते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. नये शैक्षणिक सत्र से देशभर की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पर्यावरण अध्ययन की पढ़ाई शुरू की जायेगी. इसका उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें. शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्यावरण से जुड़ा विषय स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जायेगा. कई विश्वविद्यालयों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है और नये सिलेबस को अंतिम रूप दिया जा रहा है. पाटलिपुत्र व पटना यूनिवर्सिटी के साथ-साथ अन्य यूनिवर्सिटियों में भी अंडर ग्रेजुएट स्तर पर पर्यावरण का सिलेबस तैयार किया जा रहा है. सिलेबस तैयार कर राजभवन भेजा जायेगा. राजभवन से अनुमति मिलने के बाद इसे यूजी स्तर पर शुरू किया जायेगा. पीयू के पूर्व कुलपति प्रो रास बिहार प्रसाद सिंह ने कहा कि आज के दौर में पर्यावरणीय समस्याएं केवल किताबों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसे में इस विषय की पढ़ाई उन्हें न केवल परीक्षा में, बल्कि जीवन में भी उपयोगी साबित होगी. इसमें पर्यावरण प्रदूषण, जैव विविधता, जल संरक्षण, ऊर्जा संसाधन, जलवायु परिवर्तन, कचरा प्रबंधन और सतत जीवनशैली जैसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है. नये सिलेबस में केवल सैद्धांतिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि प्रायोगिक और फील्ड आधारित गतिविधियों पर भी जोर दिया गया है.

छात्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी

विभिन्न यूनिवर्सिटियों का कहना है कि इस पहल से छात्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी. कई कॉलेजों में इको-क्लब, ग्रीन कैंपस अभियान और प्लास्टिक मुक्त परिसर जैसी गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम से जोड़ा जायेगा. इससे न सिर्फ शैक्षणिक माहौल बेहतर होगा, बल्कि कॉलेज परिसर भी अधिक स्वच्छ और हरित बनेंगे. हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. कई कॉलेजों में प्रशिक्षित शिक्षकों और संसाधनों की कमी है. इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाने की योजना है. साथ ही, डिजिटल कंटेंट, ऑनलाइन कोर्स और इ-लर्निंग प्लेटफॉर्म की मदद से इस कमी को दूर करने का प्रयास किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ANURAG PRADHAN

लेखक के बारे में

By ANURAG PRADHAN

ANURAG PRADHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन