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भविष्य में डेटा आधारित कार्रवाई ही अपराध नियंत्रण का प्रभावी हथियार

दो दिवसीय बिहार राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन मंगलवार को यह साफ संदेश सामने आया कि बिहार पुलिस अब पुराने ढर्रे पर काम करने के मूड में नहीं है.

– आंतरिक सुरक्षा, तकनीक, जवाबदेही और जन-विश्वास पर सख्त संदेश, 2026 को निर्णायक वर्ष बताया गया – राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2026 में बदली पुलिसिंग की दिशा, पुराने ढर्रे से बाहर निकलने का संकेत संवाददाता, पटना. दो दिवसीय बिहार राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन मंगलवार को यह साफ संदेश सामने आया कि बिहार पुलिस अब पुराने ढर्रे पर काम करने के मूड में नहीं है. पटेल भवन के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में पुलिसिंग में बदलाव, जवाबदेही तय करने और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया. साफ संकेत था कि भविष्य में डेटा आधारित कार्रवाई ही अपराध नियंत्रण का प्रभावी हथियार होगा. अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बीते वर्ष बिहार पुलिस के प्रदर्शन की सराहना की, लेकिन साथ ही स्पष्ट और सख्त संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि पुलिस के मूलभूत और दैनिक कार्य किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहने चाहिए. लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय की जायेगी. डीजीपी विनय कुमार ने दो टूक कहा कि पेशेवर कार्यशैली ही जन-विश्वास की कुंजी है. धारणा प्रबंधन में किसी भी तरह की चूक अब बर्दाश्त नहीं की जायेगी. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि पुलिस को जनता के साथ सहयोग और विश्वास हर हाल में मजबूत करना होगा, क्योंकि भरोसे के बिना प्रभावी पुलिसिंग संभव नहीं है. सीसीटीएनएस और डिजिटल प्लेटफॉर्म को पुलिसिंग की रीढ़ : एडीजी लोढ़ा तकनीक के मोर्चे पर अपर पुलिस महानिदेशक अमित लोढ़ा ने बिहार पुलिस को और सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने फील्ड और कार्यालयों में तैनात आईजी से लेकर डीएसपी स्तर के अधिकारियों को आने वाले समय में अपराधियों से मिलने वाली चुनौतियों के प्रति आगाह किया और कार्यशैली में बदलाव की सलाह दी. उन्होंने सीसीटीएनएस और डिजिटल प्लेटफॉर्म को पुलिसिंग की रीढ़ बताते हुए कहा कि भविष्य में डेटा आधारित कार्रवाई ही अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी हथियार बनेगी. पुलिस महानिदेशक, ऑपरेशन और विशेष शाखा कुंदन कृष्णन ने विकसित बिहार-2047 के लक्ष्य को सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 2026 बिहार पुलिस के लिए निर्णायक साबित होगा. उन्होंने स्पष्ट रोडमैप रखते हुए कहा कि जवाबदेही तय होगी और परिणाम जमीन पर दिखने चाहिए. वहीं पुलिस महानिदेशक, निगरानी जितेंद्र सिंह गंगवार ने भ्रष्टाचार के मामलों में ढिलाई पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अनुसंधान और सजा की प्रक्रिया में देरी अब स्वीकार्य नहीं होगी. आंदोलनों को लेकर किया आगाह पुलिस महानिरीक्षक, विशेष शाखा राकेश राठी ने सामूहिक आंदोलनों के उभरते स्वरूप को आंतरिक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताते हुए चेताया कि समय रहते रणनीति नहीं बदली गई तो हालात बिगड़ सकते हैं. इसके बाद पुलिस उप महानिरीक्षक, विशेष शाखा हरप्रीत कौर ने कहा कि ऐसे आंदोलनों का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोगों की मानसिकता और सामाजिक संतुलन पर भी पड़ता है. सम्मेलन के समापन पर अपर पुलिस महानिदेशक, आधुनिकीकरण सुधांशू कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

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