कोसी-मेची लिंक को केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से कर रही है विस्तार : केंद्र

Updated at : 03 Dec 2024 1:39 AM (IST)
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कोसी-मेची लिंक को केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से कर रही है विस्तार : केंद्र

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि बिहार में कोसी-मेची नदी लिंक को केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से विस्तार दे रही है.

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:: राज्यसभा में भाजपा के डा भीम सिंह के सवाल पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने दी

:: दोनों नदियों के जुड़ने से सीमांचल में दो लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ

संवाददाता,पटना

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि बिहार में कोसी-मेची नदी लिंक को केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से विस्तार दे रही है. दोनों नदियों के जुड़ने से बिहार के सीमांचल इलाके में दो लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई का लाभ मिल सकेगा. सोमवार को राज्यसभा में भाजपा के डाॅ भीम सिंह के सवाल पर जवाब देते हुए जलशक्ति मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार देश में नदियों को जोड़ने की योजना पर लगातार काम कर रही है.कोसी-मेची लिंक को भी योजनाबद्ध तरीके से विस्तार कर रही है. उन्होंने बताया कि कोसी और मेची नदियों के जुड़ने से राज्य में अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में 2,10,516 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधाएं प्रदान होगी.

डाॅ भीम सिंह के कोसी-मेची लिंक की स्थिति समेत अन्य तारांकित सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री पाटिल ने बताया कि एनडब्ल्यूडीए को बिहार सरकार से अंतरराज्यीय लिंक परियोजनाओं के संबंध में 10 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इनमें से तीन को तकनीकी रूप से व्यवहारिक पाया गया है. इसमें कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना, बूढ़ी गंडक नोन-आया-गंगा अंतरराज्यीय लिंक परियोजना और कोसी गंगा अंतरराज्यीय लिंक परियोजना शामिल हैं. उन्होंने बताया कि कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना मौजूदा पूर्वी कोसी मुख्य नहर का विस्तार करके बिहार में पड़ने वाले महानंदा नदी बेसिन के असिंचित क्षेत्रों में सिंचाई के लिए कोसी नदी के अधिशेष जल के एक हिस्से के विपथन की परिकल्पना की गयी है, ताकि बिहार में बहने वाली कोसी और मेची नदियों को राज्य के भीतर एक साथ जोड़ा जा सके.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनडब्ल्यूडीए द्वारा दिसंबर, 2022 में कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का अद्यतन करने का कार्य पूरा कर लिया गया था. बाद में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने मार्च, 2024 में बैठक कर 2022-23 के मूल्य स्तर पर 6282.32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर परियोजना को तकनीकी-आर्थिक मंजूरी दी. इतना ही नहीं, इसी साल अप्रैल में हुई विभागीय बैठक में निवेश की भी मंजूरी दी गयी है.

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