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बिहार नदी जोड़ योजना : बागमती-बूढ़ी गंडक और गंडक-छाड़ी-गंगा नदी को जोड़ा जाएगा, पांच जिलों को होगा फायदा

Updated at : 04 Dec 2022 12:28 AM (IST)
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बिहार नदी जोड़ योजना : बागमती-बूढ़ी गंडक और गंडक-छाड़ी-गंगा नदी को जोड़ा जाएगा, पांच जिलों को होगा फायदा

बिहार की पहली नदी जोड़ योजना से शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिला में बाढ़ से बचाव हो सकेगा. साथ ही बड़े इलाके में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. जल संसाधन विभाग ने योजनाओं की धीमी गति की रिपोर्ट के बाद तेजी से काम करवाने का अधिकारियों और इंजीनियरों को निर्देश दिया है.

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पटना. बिहार में बागमती-बूढ़ी गंडक और गंडक-छाड़ी-गंगा नदी जोड़ योजना का काम अगले साल 2023 में पूरा हो जायेगा. दोनों नदी जोड़ योजनाओं को पूरा होने का सीधा फायदा पांच जिला के लोगों को होगा. इनमें शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिला शामिल हैं. इन नदी जोड़ योजनाओं के पूरा होने से सिंचाई सुविधाओं का विकास होगा साथ ही बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने वाले इलाकों का बचाव हो सकेगा. जल संसाधन विभाग ने दोनों योजनाओं की धीमी गति की रिपोर्ट के बाद तेजी से काम करवाने का अधिकारियों और इंजीनियरों को निर्देश दिया है.

बागमती नदी को बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ा जाएगा

सूत्रों के अनुसार बागमती-बूढ़ी गंडक नदी जोड़ योजना में बागमती नदी को बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ा जाएगा. इसके लिए शिवहर जिला स्थित बेलवाधार योजना पर काम हो रहा है. यह बिहार की पहली नदी जोड़ योजना है. इस योजना से शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिला में बाढ़ से बचाव हो सकेगा. साथ ही बड़े इलाके में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. शिवहर से मोतिहारी जाने वाली स्टेट हाइवे पर आवागमन भी बाधित नहीं होगा. यह हर साल बागमती के पानी के कारण बाधित होता है.

बागमती का पानी बूढ़ी गंडक में जाएगा

इस योजना के द्वारा बागमती नदी के पानी को बागमती धार (बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल) को पुनर्जीवित कर चैनल के दोनों ओर बांध का निर्माण किया जायेगा. इसका मकसद बेलवा स्थित हेड रेगूलेटर के माध्यम से बागमती नदी का पानी बूढ़ी गंडक नदी में पहुंचाना है.

गंडक-छाड़ी-गंगा नदी जोड़ योजना पर हो रहा काम

गोपालगंज शहर से गुजर रही छाड़ी नदी एक तरफ से गंडक से मिली हुई थी. गंडक और छाड़ी नदी का पानी 2001 तक छपरा में गंगा नदी में गिरता था. उस समय लोग इस नदी में स्नान करते थे और इस नदी का पानी पूजा-पाठ में भी चढ़ाया जाता था. साल 2001 में गंडक नदी उफान पर आ गई और छाड़ी नदी में भी पानी बढ़ने से शहर में बाढ़ का खतरा हो गया था. खतरे को देखते हुये तत्कालीन जिलाधिकारी की पहल पर स्लूइस गेट को ईंट से जुड़ाई करवाकर बंद कर दिया गया था. मुहाना बंद करने से छाड़ी नदी में गंड़क नदी का पानी आना भी बंद हो गया. अब यह नदी पूरी तरफ से नाला में तब्दील हो गई है. अब इसके स्लूइस गेट को खोलकर छाड़ी नदी में गंडक का पानी गिराये जाने की व्यवस्था हो रही है. इससे यह नदी पुनर्जीवित हो जायेगी और इसका पानी छपरा में फिर से गंगा में गिरने लगेगा

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