बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया बदलेगी, लिखित परीक्षा को मिलेगा 80 % वेटेज, देखें लेटेस्ट अपडेट
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग
Bihar Assistant Professor Recruitment New Rules: बिहार सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए नया ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 तैयार किया है. अब बहाली सिर्फ इंटरव्यू से नहीं, बल्कि 160 अंकों की लिखित परीक्षा के आधार पर होगी. चयन में लिखित परीक्षा को 80% वेटेज मिलेगा और अधिकतम आयु सीमा घटाकर 45 वर्ष कर दी गई है.
Bihar Assistant Professor Recruitment New Rules, अनुराग प्रधान: बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद लोक भवन की ओर से जारी कमेटी ने ‘ड्राफ्ट स्टैच्यूट फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर 2025’ तैयार किया है. इसके तहत अब शिक्षकों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के आधार पर की जायेगी और पूरी प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से संचालित होगी.
ड्राफ्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को 80% और इंटरव्यू को 20% वेटेज दिया जायेगा. लिखित परीक्षा 160 अंकों की होगी, जबकि इंटरव्यू 40 अंकों का होगा. कुल मिलाकर चयन 200 अंकों के आधार पर किया जायेगा.
ड्राफ्ट के अनुसार आयोग सभी योग्य अभ्यर्थियों के लिए तीन घंटे की लिखित परीक्षा लेगा. लिखित परीक्षा का कुल अंक 160 होगा. इसमें न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक सामान्य वर्ग के लिए 50%, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 45% निर्धारित किया गया है. लिखित परीक्षा के आधार पर ही अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया जायेगा.
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और गुणवत्ता आधारित बनाना है. ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले विश्वविद्यालयों और शिक्षाविदों से सुझाव भी मांगे गये हैं.
असिस्टेंट प्रोफेसर प्रात्रता परीक्षा होगी
ड्राफ्ट के अनुसार अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में कम से कम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य होगा. एससी, एसटी, इबीसी, बीसी और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अंकों की छूट दी जायेगी. अभ्यर्थी के लिए नेट/एसएलइटी/सेट उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा.बहाली से पहले राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर प्रात्रता परीक्षा होगी.
राष्ट्रीय स्तर पर निकलेगा विज्ञापन
असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति के लिए डोमिसाइल नीति लागू नहीं की गयी है. ड्राफ्ट के अनुसार ऑल इंडिया स्तर पर खुला विज्ञापन जारी होगा. विश्वविद्यालय अपने-अपने विषयवार रिक्त पदों की जानकारी उच्च शिक्षा विभाग को भेजेंगे. विभाग इन रिक्तियों को समेकित कर आयोग को भेजेगा, जिसके आधार पर चयन प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
अधिकतम आयु किया गया कम
नये इस ड्राफ्ट में उम्र सीमा भी घटा दी गयी है. 55 वर्ष से घटा कर 45 वर्ष कर दिया गया है. ड्राफ्ट के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गयी है. आरक्षित वर्गों को सरकार के नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी.
मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर विषयवार समेकित मेरिट लिस्ट बनेगी. दो अभ्यर्थियों के अंक समान होते हैं, तो लिखित परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता मिलेगी. इसके बाद भी समानता होने पर अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जायेगी. आयोग चयनित अभ्यर्थियों की अनुशंसा उच्च शिक्षा विभाग को भेजेगा. इसके बाद विभाग संबंधित विश्वविद्यालयों को सूची भेजेगा और कुलपति आयोग की सिफारिश के आधार पर नियुक्ति करेंगे.
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ज्वाइनिंग के नियम
नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद अभ्यर्थी को एक माह के भीतर जॉइन करना होगा. विशेष परिस्थिति में अधिकतम छह महीने तक ज्वाइनिंग की अवधि बढ़ाई जा सकती है. नियुक्ति के बाद शिक्षक को संबंधित विश्वविद्यालय में कम से कम पांच वर्ष तक सेवा देनी होगी.
ड्राफ्ट के मुख्य बिंदु
लिखित परीक्षा 160 अंक, इंटरव्यू 40 अंक
चयन में लिखित परीक्षा को 80% वेटेज
तीन घंटे की लिखित परीक्षा
सामान्य के लिए 50%, एससी/एसटी/दिव्यांग के लिए 45% क्वालिफाइंग अंक
मास्टर डिग्री में 55% अंक अनिवार्य
नेट/एसएलइटी/सेट या पीएचडी आवश्यक
न्यूनतम आयु 23 वर्ष, अधिकतम 45 वर्ष
नियुक्ति के बाद पांच वर्ष तक उसी विश्वविद्यालय में सेवा अनिवार्य
डोमिसाइल नीति लागू नहीं
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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