मुख्यमंत्री की लापरवाही से 300 निवेश प्रस्तावों को नहीं मिली स्वीकृति : सुमो
Updated at : 12 Dec 2016 6:37 AM (IST)
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पटना : पूर्व उपमुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद से स्वीकृत 300 निवेश प्रस्तावों को मुख्यमंत्री की लापरवाही से महीनों स्वीकृति नहीं दी जा सकी. अब उन निवेशकों से सितंबर में लागू नयी औद्योगिक नीति के तहत दोबारा प्रस्ताव मांगा जा रहा है. 3000 करोड़ […]
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पटना : पूर्व उपमुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद से स्वीकृत 300 निवेश प्रस्तावों को मुख्यमंत्री की लापरवाही से महीनों स्वीकृति नहीं दी जा सकी. अब उन निवेशकों से सितंबर में लागू नयी औद्योगिक नीति के तहत दोबारा प्रस्ताव मांगा जा रहा है.
3000 करोड़ का प्रस्ताव था. कई उद्यमियों ने स्वीकृति की आशा में उद्योग लगाना भी प्रारंभ कर दिया है. 2011 की पुरानी औद्योगिक नीति में निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी दर्जनों प्रकार के प्रोत्साहन के अलावा 300 प्रतिशत तक वैट प्रतिपूर्ति के लाभ देने का प्रावधान था. नयी औद्योगिक नीति में कैपिटल सब्सिडी व अन्य प्रोत्साहनों को समाप्त कर केवल ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया गया है. मोदी ने कहा कि हास्यास्पद यह है कि 17 मार्च को एसआइपीबी की बैठक में जिन 75 उद्योगों को स्वीकृति दी गयी, उनकों 30 जून तक उत्पादन शुरू करने पर ही पुरानी औद्योगिक नीति के तहत लाभ मिलने की बात कही गयी. क्या मात्र तीन महीने में कोई उद्योग स्थापित होकर उत्पादन शुरू कर सकता है. 23 फरवरी को 100 करोड़ से ऊपर के छह निवेश प्रस्तावों के अलावा 63 चावल मिल व खाद्य प्रसंस्करण के करीब 800 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी थी. मुख्यमंत्री ने महीनों इन प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं दी.
इसमें निवेशकों का क्या कसूर है. हर क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतें व समस्याएं होती हैं, इसलिए जब तक अलग-अलग प्रोत्साहन नीति नहीं बनेगी, इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना संभव नहीं होगा. एनडीए के शासनकाल 2011 में बनी औद्योगिक नीति के महत्वपूर्ण प्रावधानों को नई औद्योगिक नीति में शामिल करने व क्षेत्रवार प्रोत्साहन नीति बनाने पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए.
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