जदयू ने नोटबंदी के पहले बिहार में जमीन खरीद पर भाजपा से पूछा सवाल

Updated at : 25 Nov 2016 5:00 PM (IST)
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जदयू ने नोटबंदी के पहले बिहार में जमीन खरीद पर भाजपा से पूछा सवाल

पटना : बिहारमें जदयू ने भाजपा पर नोटबंदी के कुछ हफ्ते पहले अपने स्थानीय नेताओं को जमीन खरीदवाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि यह सुनिश्चित करने के लिए इसमें कालेधन का इस्तेमाल हुआ है इसकी जांच की जाए. पटना स्थित जदयू प्रदेश मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह, नीरज सिंह और राजीव रंजन […]

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पटना : बिहारमें जदयू ने भाजपा पर नोटबंदी के कुछ हफ्ते पहले अपने स्थानीय नेताओं को जमीन खरीदवाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि यह सुनिश्चित करने के लिए इसमें कालेधन का इस्तेमाल हुआ है इसकी जांच की जाए. पटना स्थित जदयू प्रदेश मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह, नीरज सिंह और राजीव रंजन प्रसाद ने संयुक्त रूप से आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए उक्त आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की.

उन्होंने कहा कि कल एक न्यूज चैनल पर प्रसारित समाचार के अनुसार भाजपा ने अपने स्थानीय नेताओं के जरिए बिहार समेत देश के कई जिलों में नोटबंदी के कुछ हफ्ते पहले जमीन खरीदवाई थी. उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि किशनगंज और अरवल में 19 सितम्बर को जमीन खरीदी गयी. इसी प्रकार 14 सितंबर को मधुबनी और मधेपुरा में जमीन खरीदी गयी. इसके अलावा 6 सितम्बर को लखीसराय और 16 सितम्बर को कटिहार में जमीन की खरीदारी की गयी.

जदयू ने भाजपा से सवाल करते हुए जवाब मांगा कि इन सभी जगहों में खरीदी गयी जमीन की कुल राशि 4 करोड़ 7 लाख 26 हजार बतायीगयी है. यह वर्तमान बाजार भाव से काफी कम है. बिहार में जमीन का रेट बहुत ज्यादा है, क्या भाजपा ने जमीन की खरीदारी के लिए सर्किल रेट के अलावा भी रुपयों का भुगतान किया है? उन्होंने कहा कि भाजपा बताये कि जमीन की खरीददारी के लिए उसके पास रुपये कहॉ से आए ?

जमीन खरीददारी के लिए भुगतान कैश किया गया या चेक से ? जदयू के इन नेताओं ने कहा कि जमीन रजिस्टरी के कागज में हर खरीददार का पता भाजपा का दिल्ली मुख्यालय 11, अशोक रोड लिखा हुआ है. इसका मतलब रुपयों का इंतजाम भाजपा मुख्यालय के द्वारा किया गया। ये रुपये बिहार के नेताओं के पास कैसे पहुंचे ? उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में यह संशय होना लाजमी है कि भाजपा और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को नोटबंदी की पहले से जानकारी थी, क्योंकि बहुत सारी जमीन एक ही दिन और एक ही हफ्ते के दौरान विभिन्न जिलों में खरीदी गयी है.

जदयू के इन नेताओं ने कहा कि ऐसे समय में जब देशभर के लोग नोटबंदी के वजह से बुरी तरह प्रभावित हैं और कई तरह की दिक्कत का सामना कर रहे है, जदयू मांग करता है कि इन सभी जमीन खरीद के मामलों की न्यायिक और संयुक्त संसदीय समिति से जांच करवाई जाए, ताकि देश की जनता को यह साफ-साफ पता चल सके कि इन जमीनों की खरीददारी में भाजपा के ‘कालेधन’ का इस्तेमाल किया है या नहीं.

इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी नीतीश कुमार की पार्टी के इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय के लिए जिलों में जमीन खरीद का यह निर्णय एक साल पूर्व ही लिया गया था इसका नोटबंदी के निर्णय से कोई नाता नहीं. उन्होंने कहा कि इसका भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ आरटीजीएस के माध्यम की गयी. भाजपा द्वारा आयकर विभाग को किए गए रिर्टन फाईल में खर्च को लेकर विस्तृत जानकारी है. हमने कुछ भी नहीं छुपाया. सभी जानकारी वेबसाईट पर है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय और पार्टी सचिव संजीव चौरसिया ने इस प्रकार की राय व्यक्त की है. केंद्र द्वारा नोटबंदी का निर्णय लिए जाने के पूर्व इसके लीक हो जाने के बारे में सुशील ने कहा कि राहुल गांधी और मायावती जहां आरोप लगा रहे हैं कि वित्तमंत्री अरुण जेटली को भी नोटबंदी के निर्णय के बारे में जानकारी नहीं थी, ऐसे में पार्टी के अन्य नेताओं को इसके बारे में पहले से कैसे पता चल गया होगा.

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