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महागंठबंधन : सीटों पर बनी सहमति, घोषणा कल

Updated at : 16 Sep 2015 6:53 AM (IST)
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महागंठबंधन : सीटों पर बनी सहमति, घोषणा कल

पटना : विधानसभा चुनाव में सीटों के चयन और उम्मीदवारों के नामों पर सहमति को लेकर मंगलवार की देर रात महागंठबंधन में बात पटरी पर आती दिखी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक देर रात राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के अध्यक्ष शरद यादव के बीच लंबी मंत्रणा में सीट और […]

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पटना : विधानसभा चुनाव में सीटों के चयन और उम्मीदवारों के नामों पर सहमति को लेकर मंगलवार की देर रात महागंठबंधन में बात पटरी पर आती दिखी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक देर रात राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के अध्यक्ष शरद यादव के बीच लंबी मंत्रणा में सीट और उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन गयी है. एक-एक सीटों पर गहन मंथन किया गया़

अब औपचारिक एलान बाकी रह गया है. उम्मीद की जा रही है कि 17 सितंबर को राजद के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद दोनों दलों की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जायेगी.

मंगलवार की दोपहर में सीएम आवास पर शरद और नीतीश की लंबी वार्ता में उन सीटों पर भी चर्चा हुई, जिस पर राजद अपना दावा ठोक रहा है.

मोरवा, राघोपुर और महुआ समेत करीब दर्जन भर सीटें ऐसी हैं, जिन पर राजद अपना दावा छोड़ नहीं रहा. लालू और नीतीश की मंत्रणा में इन सीटों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. जानकारी के मुताबिक राजधानी की दीघा की सीट जदयू के खाते में गयी है.

पटना में कैंप किये जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिल कर राजद और कांग्रेस के साथ सीटों के चयन पर मंत्रणा की. इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह भी मौजूद थे.

सूत्रों के मुताबिक नीतीश-शरद मुलाकात के दौरान उन सभी सीटों पर चर्चा हुई, जिस पर राजद अपना दावा ठोक रखा है. जानकारी के मुताबिक माय समीकरण की मजबूती वाले करीब दो दर्जन से अधिक सीटों पर राजद का दावा है.

इन सीटों पर अभी जदयू का कब्जा है. सूत्रों के मुताबिक महागंठबंधन बुधवार को यह फैसला कर लेगा कि किस सीट से किस दल उम्मीदवार होंगे़ इधर, राजद संसदीय बोर्ड ने लालू प्रसाद को सीट और उम्मीदवार चयन के लिए अधिकृत कर दिया है. 17 सितंबर को राष्ट्रीय संसदीय दल की बैठक में सीट और उम्मीदवार पर निर्णय होगा़ जदयू और राजद की सहमति पर कांग्रेस की सीटें निर्भर है.

राजद का तर्क : राजद 15 महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम को आधार बनाना चाहता है. लोकसभ चुनाव में 185 विधानसभा सीटों पर राजद के उम्मदवार दूसरे स्थान पर रहे थे.

राजद इन सभी सीटों पर अपने को बेहतर मानता है, जबकि तकनीकी आधार पर इनमें अधिकतर सीटें अभी जदयू के कब्जे में हैं. 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू के बीच तालमेल में जदयू को माय समीकरण वाली सीटें मिली थीं. जदयू ने इन पर बेहतर प्रदर्शन किया था.

इस बार राजद की नजर अपनी दूसरे स्थानवाली सीटों पर टिकी है. समस्तीपुर जिले की मोरवा सीट पर 2010 के चुनाव में जदयू का कब्जा रहा था़ यहां से मंत्री बैजनाथ सहनी चुनाव जीते थे. सहनी को 40,266 वोट आये़ दूसरे स्थान पर आये राजद उम्मीदवार को 33,419 वोट आये.

जदयू का पक्ष : जदयू हर हाल में अपनी सीटिंग सीट पर दावा नहीं छोड़ता नजर आ रहा है. 2010 के चुनाव में जदयू ने 141 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा किये थे़ इनमें 115 सीटों पर विजय मिली थी़

इस बार महज सौ सीटों पर उसे उम्मीदवार उतारने हैं. ऐसे में वर्तमान सीटों पर पर ही उसे अपने सभी नेताओं का एडजस्टमेंट करना है. जदयू का तर्क यह भी है कि यदि उसने माय समीकरण वाली अपनी जीती सीटों पर समझौता किया, तो उसे इसके दूरगामी परिणाम भुगतने होंगे.

पार्टी प्रवक्ता डॉ अजय आलोक ने कहा कि गंठबंधन में अब कोई विवाद नहीं रह गया है. दोनों दलों ने सभी सीटों की केमेस्ट्री को भली भांति समझा है और इसी आधार पर सीट और उम्मीदवारों के चयन को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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