पटना : अलग-अलग 10 दिनों में राष्ट्रीय लोक अदालत ने निबटाये 3.87 लाख मामले
Updated at : 15 Feb 2020 7:46 AM (IST)
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13 अरब, 46 करोड़, 14 लाख, 3,527 रुपये का सेटलमेंट पटना : बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा न्यायालयों का बोझ कम करने के लिये मामलों का आपसी सुलह समझौते के आधार पर निबटारा कराया जा रहा है. लाखों लंबित वादों के पहाड़ को हटाने के लिए एक दिन की इन राष्ट्रीय लोक अदालतों में […]
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13 अरब, 46 करोड़, 14 लाख, 3,527 रुपये का सेटलमेंट
पटना : बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा न्यायालयों का बोझ कम करने के लिये मामलों का आपसी सुलह समझौते के आधार पर निबटारा कराया जा रहा है. लाखों लंबित वादों के पहाड़ को हटाने के लिए एक दिन की इन राष्ट्रीय लोक अदालतों में एक बार में औसतन 38 हजार से अधिक वाद निबटाये जा रहे हैं. प्राधिकार दो साल में 10 राष्ट्रीय लोक अदालतों में 03 लाख, 84,762 मामलों का निबटारा कर चुका है. 13 अरब, 46 करोड़, 14 लाख, 3527 रुपये का सेटलमेंट भी किया गया.
इनमें भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली- पानी बिल मामले, भरण पोषण, एनआइ एक्ट, धन वसूली के वाद, कंपाउंडेबली मामले, श्रम विवाद, वैवाहिक विवाद, सेवा से जुड़े मामले, राजस्व मामले, किराया दीवानी आदि मामलों का परस्पर वार्ता के आधार पर निबटारा कराया जाता है. वर्ष 2018 से फरवरी, 2020 तक 10 राष्ट्रीय लोक अदालतें लगी हैं. वर्ष 18 में पांच, 19 में चार तथा इस वर्ष एक राष्ट्रीय लोक अदालत लगायी गयी है. इनमें करीब 31 लाख, 38,831 मामले लिये गये थे.
फैसले के साथ ही वापस हो जाता है न्याय शुल्क : पटना. लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी बातचीत के आधार पर मामलों का तुरंत निबटारा किया जाता है. इसमें जो फैसला सुनाया जाता है उसे सिविल कोर्ट की डिक्री की तरह कानूनी मान्यता मिली हुई है. यहीं नहीं यदि कोई न्याय शुल्क दिया गया है तो मामले के निबटारे के बाद उसे लौटा दिया जाता है.
प्राधिकार का लक्ष्य है कि राष्ट्रीय लोक अदालत में ज्यादा से ज्यादा मामलों को का निबटारा कराया जाये. इसके लिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है. प्राधिकार और उससे जुड़े पदाधिकारी अपने-अपने स्तर पर इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं.
सुनील दत्त मिश्रा, सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार
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