आमिर का पता नहीं लगा पायी पुलिस

Updated at : 26 Dec 2019 8:33 AM (IST)
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आमिर का पता नहीं लगा पायी पुलिस

फुलवारी शरीफ : राजद के बिहार बंद के दौरान हुए बवाल के बीच लापता हारुन नगर के युवक आमिर हंजला का पांचवें दिन भी कोई अता पता लगाने में पुलिस टीम विफल रही. हालांकि पुलिस की कई टीम लगातार उसकी तलाश में लगी हुई है. इलाके में लगे सीसीटीवी और प्रदर्शन व बवाल का वीडियो […]

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फुलवारी शरीफ : राजद के बिहार बंद के दौरान हुए बवाल के बीच लापता हारुन नगर के युवक आमिर हंजला का पांचवें दिन भी कोई अता पता लगाने में पुलिस टीम विफल रही. हालांकि पुलिस की कई टीम लगातार उसकी तलाश में लगी हुई है. इलाके में लगे सीसीटीवी और प्रदर्शन व बवाल का वीडियो खंगाला जा रहा है लेकिन आमिर का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.

उधर लापता युवक आमिर के मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता सह नेशनल एलाइंस फॉर पीपुल्स मूवमेंट के राज्य संयोजक काशिफ यूनुस, अधिवक्ता नंद सागर, समाजसेवी सफदर अली, ह्यूमन राइट्स के स्टेट हेड दीपक कुमार, लॉ स्टूडेंट्स अतुल कुमार की टीम ने फुलवारीशरीफ थाना में डीएसपी रमाकांत प्रसाद से मुलाकात की.
अधिवक्ता काशिफ यूनुस ने बताया कि उनके साथ लापता युवक के पिता मो सोहैल भी थे. इस मामले में पुलिस की अब तक की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है. इस मामले को वरीय अधिकारियों और अन्य फोरम के पास उठाया जायेगा.
पुलिस ने उनलोगों को बताया कि जिन उपद्रवियों पर युवक को लापता करने की आशंका है वे सभी फरार चल हैं. थानेदार रफीकुर रहमान ने बताया कि हर पहलू पर तहकीकात करने में कई टीमों को लगाया गया है लेकिन उसका कोई ट्रेस नहीं लग पा रहा है. वहीं बेटे आमिर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाने से परिजनों का बुरा हाल हो रहा है.
मां अनवरी खातून दरवाजे पर बेटे आमिर के लौट आने की टकटकी लगाये बैठी है तो मदरसा बोर्ड में काम करने वाले पिता मो सोहेल पुलिस अधिकारियों के दरवाजे चक्कर लगाते फिर रहे हैं. घर की माली हालत अत्यंत ही दयनीय है इसके चलते ही आमिर फुलवारी के एक बैग कारखाने में काम करके परिवार के गुजारे में सहारा बना हुआ था.
आमिर के छोटे भाई बहनों का भी हाल बुरा है. हर वक्त उसका छोटा भाई किराये के मकान के नीचे कॉलोनी के मोड़ की ओर नजर गड़ाये रहता है की शायद अब उसका भाई घर वापस आ जाये. आमिर के पड़ोसी और दोस्त लगातार उसके घर आकर परिवार को दिलासा देने में लगे हैं. जैसे-जैसे दिन बीत रहा है परिवार के सब्र का बांध टूट रहा है.
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