रोजगार मेले में नहीं आ रहे बेरोजगार, मेले में बड़ी कंपनियों के नहीं आने के कारण युवा नहीं ले रहे रुचि

Published at :08 Dec 2019 4:41 AM (IST)
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रोजगार मेले में नहीं आ रहे बेरोजगार, मेले में बड़ी कंपनियों के नहीं आने के कारण युवा नहीं ले रहे रुचि

पटना : जिला और प्रमंडल मुख्यालयों में लगाये जा रहे रोजगार मेेले में बड़ी कंपनियां शामिल नहीं हो पा रही हैं. इसका नतीजा है कि आम बेराेजगर युवा भी रोजगार मेले की ओर नहीं आ रहे. श्रम संसाधन विभाग जिला व प्रमंडलों में हर माह रोजगार मेला लगाता है. रोजगार मेले में जिनका चयन हुआ […]

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पटना : जिला और प्रमंडल मुख्यालयों में लगाये जा रहे रोजगार मेेले में बड़ी कंपनियां शामिल नहीं हो पा रही हैं. इसका नतीजा है कि आम बेराेजगर युवा भी रोजगार मेले की ओर नहीं आ रहे. श्रम संसाधन विभाग जिला व प्रमंडलों में हर माह रोजगार मेला लगाता है.

रोजगार मेले में जिनका चयन
हुआ है, उसमें ऐसी कोई बड़ी कंपनियां नहीं हैं, जिसमें स्नातक, एमबीए, एमसीए व आइटीआइ पास छात्रों को उनके ट्रेड के मुताबिक नौकरी मिली हो. जिन बेरोजगारों को सिक्यूरिटी एजेंसी में ही नौकरी मिली है, उनमें कितने काम कर रहे हैं या कितनों ने छोड़ दिया, इसका भी कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है.
रोजगार मेले में मांगी जाती है सिक्यूरिटी मनी, विभाग को शिकायत
मिली है कि रोजगार मेले में आने वाली कंपनियां भी आवेदकों से सिक्यूरिटी मनी मांगती हैं. जिसे कई अभ्यर्थी नहीं दे पाते हैं. कई बार सिक्यूरिटी मनी लेने के बाद कंपनियां तय वेतन नहीं देती हैं. वहीं, जिसने सिक्यूरिटी मनी दे रखी है, वह जॉब छोड़कर जाना चाहते हैं, तो उनकी सिक्यूरिटी मनी वापस नहीं की जाती है. इस कारण भी रोजगार मेले में बेरोजगार नहीं पहुंच रहे हैं.
10.17 लाख से अधिक युवा निबंधित
राज्य भर में एनसीएस पाेर्टल पर 10.17 लाख से अधिक युवा निबंधित हो चुके हैं. साथ ही इ-वैन के माध्यम से 11994 आवेदकों को निबंधित किया गया है. इसके बाद भी जॉब कैंप में दसवीं व इंटर पास बेरोजगार छात्र पहुंच रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक जॉब कैंप में जब तक बड़ी कंपनियां नहीं आयेंगी, पोर्टल पर बस निबंधन का आंकड़ा बढ़ेगा.
बाहर नौकरी छूटने के बाद बिहार लौट रहे लोग : अप्रवासी मजदूरों की संख्या राज्य सरकार के पास नहीं है. इस कारण से कितने बिहारी नौकरी छूटने के कारण बिहार वापस आ गये, इसका कोई वैधानिक आंकड़ा सरकार के पास नहीं है, लेकिन विभागीय अधिकारी मानते हैं कि देश में कंपनियों का हाल खराब है, तो उसमें काम करने वाले मजदूर उससे कैसे अछूते रहेंगे. जब मजदूर प्रभावित हो रहे हैं, तो बिहारी सबसे अधिक बेरोजगार होंगे.
आंकड़ा : श्रम संसाधन विभाग हर साल कम-से-कम 50 से अधिक जॉब कैंप राज्य के विभिन्न जिलों में लगाता है. विभाग के मुताबिक 35 से अधिक कंपनियां कैंप में आती हैं. फिर भी पिछले साल औसतन हर माह 2100 बेरोजगारों को नौकरी मिली, जबकि 2019 में नवंबर बीत जाने पर भी 6689 को ही रोजगार मिल सका है. यानी एक महीने में 800 से कुछ अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जो पिछले साल के 2100 से एक तिहाई से भी कम है.
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