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पटना : नल जल योजना में हुई बोरिंग की होगी जांच

Updated at : 25 Jul 2019 9:23 AM (IST)
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पटना : नल जल योजना में हुई बोरिंग की होगी जांच

ठीक काम नहीं करने वालों पर होगी एफआइआर पटना : मुख्यमंत्री नल जल योजना के तहत मार्च 2020 तक बिहार के हर परिवार को नल से शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है. इसको लेकर राज्य के लगभग जिलों में टेंडर का काम पूरा हो गया है और कुछ जिलों में योजना के तहत घरों तक […]

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ठीक काम नहीं करने वालों पर होगी एफआइआर
पटना : मुख्यमंत्री नल जल योजना के तहत मार्च 2020 तक बिहार के हर परिवार को नल से शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है. इसको लेकर राज्य के लगभग जिलों में टेंडर का काम पूरा हो गया है और कुछ जिलों में योजना के तहत घरों तक पानी पहुंचने लगा है. पीएचइडी ने बोरिंग व पाइपलाइन की डिजाइन आगामी 30 वर्षों को देखकर किया है, ताकि लोगों को 30 वर्षों तक इस योजना से पानी को लेकर कोई दिक्कत नहीं हो.
बावजूद इसके कई जिलों से विभाग के पास शिकायत आती है कि काम की क्वालिटी ठीक नहीं है. इसके बाद विभाग ने काम की समीक्षा शुरू कर दी है. बोिरंग की जांच होगी, वहीं जिस ठेकेदार को काम सौंपा गया है, अगर उसने काम ठीक से नहीं किया है, तो संबंधित ठेकेदार व अधिकारियों पर विभाग सीधे एफआइआर करायेगा.
राज्य में कुल 8386 ग्राम पंचायतें और एक लाख 14 हजार 691 वार्ड हैं, जिनमें से पीएचइडी द्वारा 56,079 वार्डों में हर घर नल का जल पहुंचाया जायेगा और बाकी 58,612 वार्डों में हर घर नल का जल का काम पंचायती राज विभाग के द्वारा कराया जायेगा. पीएचइडी के लिए निर्धारित 56,079 वार्डों में से 30,497 वार्ड गुणवत्ता प्रभावित है, जिनमें से 5085 वार्डों में आर्सेनिक, 3814 वार्डों में फ्लोराइड और 21,598 वार्डों में अधिक आयरन है.
थर्ड पार्टी से जांच कराता है पीएचइडी : विभाग नल जल योजना के लिए थर्ड पार्टी से जांच कराता है. इसके माध्यम से काम की क्वालिटी की जांच होती है. अगर काम में गड़बड़ी मिलती है, तो इसकी रिपोर्ट के बाद ही आगे कांट्रेक्टर पर कड़ी कार्रवाई करने का नियम है. पीएचइडी मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि नल जल योजना तय समय तक पूरा कर लिया जायेगा. काम की क्वालिटी में शिकायत कहीं से भी मिलेगी, तो जांच के बाद उनके ऊपर मामला दर्ज कराया जायेगा.
नल जल के लिए जमीन का निबंधन होगा मुफ्त
मुख्यमंत्री नल जल योजना के लिए वार्डों में बोरिंग का काम चल रहा है. बाेरिंग एवं टंकी बैठाने के लिए जमीन की जरूरत पीएचइडी को पड़ती है. अब इन सरकारी जमीनों को पीएचइडी के नाम पर रजिस्ट्री के लिए कोई स्टांप नहीं लगेगा. किसी भी विभाग की जमीन जब नल जल के लिए पीएचइडी लेगी, तो उसका निबंधन मुफ्त में किया जायेगा. इस संदर्भ में विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है.
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