महागठबंधन : हम व वीआइपी जैसा सम्मान नहीं मिला शरद यादव को
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : गठबंधन की राजनीति में लड़े जा रहे इस लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक भीड़ महागठबंधन की ओर लपकी है. कई छोटे दलों के लिए महागठबंधन ठिकाना बना. इस महागठबंधन में जीतन राम मांझी की पार्टी हम को लोकसभा की तीन सीटें मिल गयी हैं. महागठबंधन ने नवगठित मुकेश सहनी की वीआइपी को भी तीन […]
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पटना : गठबंधन की राजनीति में लड़े जा रहे इस लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक भीड़ महागठबंधन की ओर लपकी है. कई छोटे दलों के लिए महागठबंधन ठिकाना बना. इस महागठबंधन में जीतन राम मांझी की पार्टी हम को लोकसभा की तीन सीटें मिल गयी हैं. महागठबंधन ने नवगठित मुकेश सहनी की वीआइपी को भी तीन सीटें हासिल हो गयीं.
जबकि, तीन दलों को महागठबंधन में कोई स्थान नहीं मिला. शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) को अलग से कोई सीट नहीं मिली. बल्कि, उनको राजद ने अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाने का फैसला इस शर्त पर किया कि चुनाव के बाद उनकी पार्टी का राजद में विलय हो जायेगा. इधर, पिछले विधानसभा चुनाव से स्वतंत्र पार्टी जापलो बना कर घुम रहे राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को भी महागठबंधन में कोई स्थान नहीं मिला.
उनकी पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस की सांसद हैं, जबकि वह खुद मधेपुरा के सांसद हैं. उनकी जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक (जापलो) को महागठबंधन ने एक भी सीट न देकर स्वतंत्र छोड़ दिया है. इसी का नतीजा है कि उन्होंने मधेपुरा से मैदान में उतरने की घोषणा की है. अरुण कुमार भी रालोसपा से अलग होने के बाद अपने लिए कोई सीट की व्यवस्था नहीं कर सके.
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