पटना : प्रदूषण के कारण बढ़ रहीं कान व नाक की बीमारियां
Updated at : 06 Feb 2019 7:10 AM (IST)
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पटना : पटना सहित पूरे बिहार में बढ़ते प्रदूषण की चपेट में आने वाले लोग इन दिनों नाक, कान व गले की बीमारी से पीड़ित हैं. प्रदूषण के कारण एलर्जी से पीड़ित 15 से अधिक ऐसे मरीज हैं, जो आइजीआइएमएस पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों ने इसे एलर्जिक रायनायटिस नाम दिया है. आम बोलचाल की भाषा […]
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पटना : पटना सहित पूरे बिहार में बढ़ते प्रदूषण की चपेट में आने वाले लोग इन दिनों नाक, कान व गले की बीमारी से पीड़ित हैं. प्रदूषण के कारण एलर्जी से पीड़ित 15 से अधिक ऐसे मरीज हैं, जो आइजीआइएमएस पहुंच रहे हैं.
डॉक्टरों ने इसे एलर्जिक रायनायटिस नाम दिया है. आम बोलचाल की भाषा में इसे नाक की एलर्जी बोला जाता है. इस तरह की बातें मंगलवार को आइजीआइएमएस की ओर से आयोजित जन्मजात बहरेपन के कारण व इलाज विषय पर आयोजित सेमिनार में डॉक्टरों ने कही.
गले में खराश व नाक में एलर्जी के अधिक मरीज
बातचीत के दौरान इएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि क्रोनिक डिसएबिलिटी (लगातार अपंगता) करने वाली प्रथम 10 बीमारियों में एलर्जिक रायनायटिस का भी स्थान है.
इस तरह से एलर्जिक रायनायटिस हमारे रोजमर्रा के जीवन में परेशानी का सबब बनती जा रही है. शहर में बढ़ते प्रदूषण व इससे बचाव नहीं करने वाले मरीज इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. इसके अलावा प्रदूषण के कारण गले में खराश व सांस लेने की परेशानी के भी मरीज विभाग में पहुंच रहे हैं.
इसलिए हो रही बीमारी
कल करखानों का काला धुआं, सड़क की धुल व मिट्टी घर में प्रवेश करना, या उसकी चपेट में आना
अशुद्ध पानी पीना
शांत वातावरण का नहीं होना, वाहन के धुएं हुए शरीर में प्रवेश करना
अशुद्ध हवा : ध्वनि प्रदूषण
बीमारी से बचाव : अपने घर के पर्दे, चादरें, कालीन और खिलौनों को हमेशा धोकर साफ रखें
घर से बाहर निकले तो मुंह पर मास्क जरूर लगाएं
अगर वैक्यूम क्लीनर है तो झाड़ू लगाने के साथ ही वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें.
50 लाख बच्चे जन्मजात बहरेपन के शिकार
पटना : बिहार सहित पूरे भारत की आबादी के लगभग 6.3 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिनको ठीक से सुनाई नहीं देता. पूरे भारत में करीब 50 लाख बच्चे ऐसे हैं, जो जन्मजात बहरेपन का शिकार हैं. आइजीआइएमएस में मंगलवार को जन्मजात बहरेपन, प्रकार और उसके निदान को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. सेमिनार में इएनटी, पेडियाट्रिक व कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ एनआर विश्वास ने किया.
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