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पटना : पूर्व डीएसपी राजकुमार यादव फर्जी एनकाउंटर में दोषी करार, आज सुनायी जायेगी सजा

Updated at : 01 Feb 2019 6:39 AM (IST)
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पटना : पूर्व डीएसपी राजकुमार यादव फर्जी एनकाउंटर में दोषी करार, आज सुनायी जायेगी सजा

पटना : पूर्व डीएसपी और कोतवाली थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजकुमार यादव को पटना के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी करार दिया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट -2 के जज अब्दुल सलाम ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. सजा की घोषणा शुक्रवार को की जायेगी. दोषी करार दिये जाने के बाद राजकुमार […]

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पटना : पूर्व डीएसपी और कोतवाली थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजकुमार यादव को पटना के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी करार दिया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट -2 के जज अब्दुल सलाम ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. सजा की घोषणा शुक्रवार को की जायेगी.
दोषी करार दिये जाने के बाद राजकुमार यादव को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया. हालांकि अन्य सभी तीन आरोपित पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया गया. यह घटना तीन सितंबर, 1995 की है. पुलिस ने दानापुर के गाभतल से चार लड़कों को उठाया था. अगले दिन पुलिस ने दो को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था. दो अब तक लापता हैं. पटना हाइकोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने मामले की जांच की थी.
हिरासत में लिये गये राजकुमार, अन्य सभी पुलिसकर्मी बरी
मारते-पीटते जिप्सी में लाद कर ले गयी, अगले दिन दो की लाशें मिलीं : सीबीआइ के आरोपपत्र के मुताबिक कोतवाली थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर राजकुमार यादव ने पुलिस बल के साथ दानापुर के गाभतल इलाके में विनोद सिंह के मकान से चार लड़कों अशोक कुमार, राजेश कुमार उर्फ चुन्नु, दिनेश कुमार व योगेंद्र सिंह को उठाया.
पुलिस इन्हें मारते-पीटते जिप्सी में लाद कर ले गयी. अगले दिन राजेश और योंगेंद्र की लाशें मिलीं. पुलिस ने इन्हें मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया. वहीं, लड़कों के परिजनों का आरोप था कि चारों सिनेमा देख कर आये थे और पुलिस इन्हें उठा कर ले गयी और गोली मार कर हत्या कर दी. दो लड़कों के बारे में आज तक कोई सुराग नहीं मिली है.
पटना हाइकोर्ट ने जांच के लिए सीबीआइ को सौंपा था मामला : पीड़ित परिजनों ने 1997 में पटना हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाइकोर्ट ने 1998 में मामले को सीबीआइ को जांच के लिए सौंप दिया. सीबीआइ ने करीब चार साल तक तहकीकात की और एक मई, 2002 को आरोपपत्र दायर कर दिया.
आरोपपत्र में राजकुमार यादव, दारोगा अभय कुमार सिंह व लालचंद राम, जमादार विभा कुमारी के खिलाफ आरोप सही पाये गये. मामले में एक अन्य आरोपित दारोगा निर्मल कुमार की ट्रायल के दौरान मौत हो गयी है.ट्रायल के दौरान सीबीआइ ने कोर्ट में तीन दर्जन गवाह उतारे. गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई हुई और जज ने राजकुमार यादव को दोषी करार दिया.
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