पटना : निशाने पर लगेगी गोली, तभी आर्म्स लाइसेंस
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Jan 2019 8:01 AM (IST)
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पटना : राज्य में अब आर्म्स लाइसेंस बनवाने के लिए शूटिंग की प्रतिभा दिखानी होगी. किसी तरह का लाइसेंसी हथियार रखने के पहले सरकार को यह प्रमाणित करके बताना होगा कि उसे आप चला सकते हैं. अगर हथियार से फायरिंग करने में आप सक्षम नहीं है, तो किसी सूरत में लाइसेंस नहीं दिया जायेगा. इसके […]
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पटना : राज्य में अब आर्म्स लाइसेंस बनवाने के लिए शूटिंग की प्रतिभा दिखानी होगी. किसी तरह का लाइसेंसी हथियार रखने के पहले सरकार को यह प्रमाणित करके बताना होगा कि उसे आप चला सकते हैं. अगर हथियार से फायरिंग करने में आप सक्षम नहीं है, तो किसी सूरत में लाइसेंस नहीं दिया जायेगा. इसके लिए किसी मान्यताप्राप्त शूटिंग संस्थान में बकायदा टेस्ट देकर सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा.
यह नियम नये और पुराने या ट्रांसफर वाले लाइसेंस दोनों पर समान रूप से लागू होगा. इसमें लाइसेंस धारक की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारियों को लाइसेंस ट्रांसफर के मामले, लाइसेंस धारक की 70 वर्ष की उम्र होने और 25 वर्ष या उससे ज्यादा समय से जिनके पास लगातार लाइसेंस मौजूद है, उन्हें इस टेस्ट से पास होकर सर्टिफिकेट लेना होगा.
इस शूटिंग सर्टिफिकेट के आधार पर ही लाइसेंस धारकों का लाइसेंस आगे भी जारी रखा जायेगा. अगर लाइसेंस धारक शूटिंग में फेल होते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द हो जायेगा और उन्हें अपना लाइसेंसी आर्म्स सरेंडर करना पड़ेगा. इसके बाद उन्हें नये स्तर से लाइसेंस बनवाना पड़ेगा.
बिहार में नहीं है कोई शूटिंग का संस्थान
इस आदेश को अमलीजामा पहनाने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि यह सर्टिफिकेट बनेगा कहां से. बिहार में इस तरह का कोई शूटिंग संस्थान नहीं है. यूपी में भी ऐसा संस्थान नहीं है. सिर्फ झारखंड के रांची में इस तरह का एक संस्थान है, जहां से लाकर यह सर्टिफिकेट जमा करना होगा. यानी किसी को लाइसेंस लेने से पहले झारखंड से जाकर शूटिंग का सर्टिफिकेट लाना होगा, तभी वह इसके लिए पूरी तरह से योग्य साबित होगा.
करीब एक लाख लाइसेंस धारक हैं राज्य में
राज्य में अभी करीब एक लाख लाइसेंस धारक हैं, जिनमें राइफल और रिवाल्वर दोनों तरह के लाइसेंस शामिल हैं. इन सभी लाइसेंसी हथियारों के डिजिटलाइजेशन का काम पूरे राज्य में चल रहा है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर सभी लाइसेंसी आर्म्स को 16 अंकों का एक यूनिक कोड देना है, जिससे उसकी पहचान समेत तमाम जानकारी कहीं से ऑनलाइन देखी जा सके. साथ ही यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि कितनी संख्या में किस राज्य में हथियार मौजूद हैं. इसका काम भी फिलहाल गति काफी धीमी है. महज 40% हथियारों की ही जानकारी ऑनलाइन अपलोड हो पायी है.
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