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शराबबंदी के बाद : अब न शोर-शराबा, न बिक रही है शराब, बस्ती में ककहरे की गूंज, खेती से खुशहाली

Updated at : 31 Dec 2018 7:26 AM (IST)
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शराबबंदी के बाद : अब न शोर-शराबा, न बिक रही है शराब, बस्ती में ककहरे की गूंज, खेती से खुशहाली

अंजनी कुमार सिंह शराबबंदी से गोराडीह अगपुर पंचायत के महादलित टोले में आया अनोखा बदलाव सबौर : शराबबंदी गोराडीह क्षेत्र के अगरपुर पंचायत के लिए वरदान साबित हो रहा है. कल तक जहां दिन-रात सिर्फ कोलाहल था, आज लोग सुकून भरी जिदंगी जीना शुरू कर दिये हैं. पुश्तैनी कारोबार को छोड़ कर अब नया नया […]

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अंजनी कुमार सिंह
शराबबंदी से गोराडीह अगपुर पंचायत के महादलित टोले में आया अनोखा बदलाव
सबौर : शराबबंदी गोराडीह क्षेत्र के अगरपुर पंचायत के लिए वरदान साबित हो रहा है. कल तक जहां दिन-रात सिर्फ कोलाहल था, आज लोग सुकून भरी जिदंगी जीना शुरू कर दिये हैं. पुश्तैनी कारोबार को छोड़ कर अब नया नया काम कर रहे हैं.
मवेशी पालन, दिहाड़ी मजदूरी, बटाई पर खेती व आइसक्रीम बेच कर सुख-शांति से रह रहे हैं. अब न ही कचकच है न ही कोई शोर-शराबा. अब बस्ती में शोर-शराबा की जगह बच्चे का ककहरा गूंजता है. इस टोले के लोग सूर्योदय के साथ ही अपना काम बच्चे और रोजगार के लिए आपस में भाईचारा से मिल-जुल कर कर रहे हैं. गोराडीह प्रखंड के अगपुर पंचायत के वार्ड संख्या आठ के महादलित टोले में आम लोग जाने से कतराते थे. दिन भर शराबियों की जमघट लगी रहती थी. लेकिन, शराबबंदी से दशा और दिशा दोनों बदल रहा है.
लोग जी रहे हैं सुकून भरी जिदंगी
गाना-बजाना का कार्य करते हैं गोपाल : गांव के पूर्व वार्ड सदस्य गोपाल चौधरी बताते हैं कि 25 से 30 घरों के इस टोले में ज्यादातर परिवार पुश्तैनी कारोबार से जुड़े थे. लेकिन, अब टोले की ज्यादातर आबादी, दिहाड़ी मजदूरी सहित अन्य काम कर खुशी से जीवनयापन कर रहे हैं.
स्वयं गोपाल इस कारोबार को छोड़ दिहाड़ी मजदूरी के साथ गाना बजाना का कार्य करते हैं व आसपास के इलाके में होनेवाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोग इन्हें जरूर दावत देकर बुलाते हैं. सरकार की पहल से गांव का वातावरण ही बदल गया है. बच्चे स्कूल न के बराबर जाते थे. अब हर घर से बच्चे स्कूल जा रहे हैं.
अगरपुर के आनंदपुर चौक पर दिन-रात सड़क जाम की स्थिति सिर्फ शराबियों से बनी रहती थी. आज खुद शराब विक्रेता सुनील मंडल रेडिमेड कपड़े बेचते हैं. वह बताते हैं कि जब तक यहां शराब की बिक्री होती थी, तब आसपास के गांव के लोग तबाही के कगार पर आ गये थे.
मारपीट, हो-हल्ला के लिए यह चौक प्रसिद्ध हो गया था. समय बदला, सबकुछ बदल गया. जहां शराब बिकती थी, आज उसमें कपड़े की दुकान चल रही है और आसपास में कई व्यावसायिक दुकानें शांतिपूर्ण माहौल में चल रही है.
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