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गुजरात प्रकरण : चुनाव को टारगेट कर बिहारियों संग हो रही हिंसा, घटना से आम आदमी को कोई लेना-देना नहीं

Updated at : 16 Oct 2018 5:47 AM (IST)
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गुजरात प्रकरण : चुनाव को टारगेट कर बिहारियों संग हो रही हिंसा, घटना से आम आदमी को कोई लेना-देना नहीं

निशाना क्यों बनते हैं बिहारी : गुजरात की घटना से वहां के आम आदमी को कोई लेना-देना नहीं है आईसी कुमार सेवानिवृत्त आईएएस पटना : गुजरात में बिहार व यूपी के लोगों पर हो रहे हमले पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है. इस घटना को संकुचित राजनीतिक दल से जुड़े लोग अंजाम दे रहे हैं. […]

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निशाना क्यों बनते हैं बिहारी : गुजरात की घटना से वहां के आम आदमी को कोई लेना-देना नहीं है
आईसी कुमार सेवानिवृत्त आईएएस
पटना : गुजरात में बिहार व यूपी के लोगों पर हो रहे हमले पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है. इस घटना को संकुचित राजनीतिक दल से जुड़े लोग अंजाम दे रहे हैं. आम आदमी को इससे कोई लेना-देना नहीं है.
अगले चुनाव को टारगेट कर बिहारियों के साथ हिंसा हो रही है. उक्त बातें भारतीय प्रशासनिक के सेवानिवृत्त अधिकारी आईसी कुमार ने कहीं. उन्होंने कहा कि गुजरात के लोगों द्वारा नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों की यह हरकत है. ऐसे लोग वहां की जनता के साथ-साथ सरकार को भी बदनाम करने में लगे हैं. ऐसे भी गुजरात के लोग पूरे देश में हैं. वे कभी नहीं चाहेंगे कि इस तरह की घटनाएं हो. उनकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बिहार के लोगों का काफी याेगदान है.
उन्होंने कहा कि गुजरात में प्रशासनिक महकमे में बिहार के लोग उच्च पदों पर बैठे हैं. ऐसे में गुजरात में रहने वाले बिहार सहित अन्य राज्यों के रहने वाले लोगों की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी बनती है. बिहार सरकार की भी प्रवासी बिहारियों के सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी बनती है. इसके लिए जो भी व्यवस्था बन सके उसे करना चाहिए.
एेतिहासिक है बाहर जाने का सिलसिला
आईसी कुमार ने कहा कि बिहार के लोगों का बाहर जाकर रहना कोई नयी बात नहीं है. बिहार से गिरमटिया मजदूर बाहर जाते थे. बिहार के लोगों का बाहर जाना ऐतिहासिक है. 1981 की जनगणना के अनुसार संयुक्त बिहार की आबादी छह करोड़ में 40 लाख प्रवासी बिहारी थे.
बिहार से बाहर अवसर अधिक होने के कारण वे न केवल जाते हैं, बल्कि अधिक समय तक रहने से वहीं बस भी जाते हैं. दूसरी बात अन्य राज्यों में बिहार के लोगों की उपयोगिता को लोग बखूबी जान चुके हैं. क्योंकि, बिहार के लोग मेहनती के रूप में जाने जाते हैं.
औद्योगिकीकरण नहीं होने से विकास बाधित
आईसी कुमार ने कहा कि कृषि प्रधान होने के कारण राज्य में औद्योगिकीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया. इससे विकास बाधित रहा. राेजगार के अवसर भी नहीं बढ़े. विकास की यात्रा कई कारणों से अवरोध रही. इसके परिणामस्वरूप मजबूरीवश लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है. एग्रो इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन किया जा सकता है.
उद्यमिता विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है. गांवों में कुटीर व लघु उद्योग नहीं पनपा. शिक्षा बुनियादी जरूरत है. डीएस कोठारी कमेटी की रिपोर्ट में 40 फीसदी वोकेशनल एजुकेशन कोर्स पर ध्यान देने की बात कही गयी थी. लंबे अरसे तक वोकेशनल एजुकेशन पर ध्यान नहीं दिया गया. अगर सरकार रोजगार को लेकर ध्यान देती तो लोग लाइबलिटी नहीं एसेट्स होते.
सुरक्षा देना जिम्मेदारी
आईसी कुमार ने कहा कि प्रवासी लोगों को सुरक्षा देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है. जिस राज्य के नागरिक हैं, उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि अपने लोगों की सुरक्षा के लिए संबंधित सरकार से पहल करे. उन्होंने कहा कि देश को जाति, धर्म, क्षेत्रीय आधार पर बांटना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.
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