पटना : राष्ट्रीय पोषण माह का समापन आज, पोषण अभियान में दो करोड़ से अधिक लोगों की हुई भागीदारी

Updated at : 30 Sep 2018 5:31 AM (IST)
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पटना : राष्ट्रीय पोषण माह का समापन आज, पोषण अभियान में दो करोड़ से अधिक लोगों की हुई भागीदारी

पटना : राष्ट्रीय पोषण महीने के तहत बिहार में सितंबर में आयोजित कार्यक्रमों में दो करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी हुई है. इस दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण कम करने को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है. इसके लिए समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय की देखरेख में सभी जिलों में व्यापक […]

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पटना : राष्ट्रीय पोषण महीने के तहत बिहार में सितंबर में आयोजित कार्यक्रमों में दो करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी हुई है. इस दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण कम करने को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है. इसके लिए समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय की देखरेख में सभी जिलों में व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था. समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर सितंबर महीने में राष्ट्रीय पोषण अभियान चलाया गया. इसके तहत बच्चों में कुपोषण से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया. इसमें राज्य के करीब 94,000 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका और सहायिका सहित 84,000 से अधिक आशा वर्कर का भी सहयोग लिया गया.
देश में सुधर रही है बिहार की रैंकिंग
देश भर में कुपोषण दूर करने के मामले में बिहार कुछ दिनों पहले 9वें स्थान पर था. अब राष्ट्रीय पोषण महीने में बढ़िया प्रदर्शन के कारण इसकी रैंकिंग सुधरने की संभावना है. वहीं राज्य में एक से सात सितंबर तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना सप्ताह का बेहतर आयोजन करने पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश भर में बिहार को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया है.
क्या है मकसद : राष्ट्रीय पोषण अभियान का मकसद प्रतिवर्ष दो फीसदी की दर से नाटापन, दो फीसदी की दर से कुपोषण, दो फीसदी की दर से दुबलापन और तीन फीसदी की दर से एनीमिया के मरीजों की संख्या में कमी लाना है.
दरअसल हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट में बिहार में शून्य से पांच साल तक के 48.3 फीसदी बच्चों को कुपोषण के चलते बौनेपन का शिकार बताया गया है. साथ ही राज्य में कुल 47.3 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं.
इन जिलों में है गंभीर स्थिति : राज्य के 38 जिलों में से 23 जिलों में बच्चों में कुपोषण की स्थिति गंभीर है. इनमें बक्सर, गया, नवादा, नालंदा, कैमूर, भोजपुर, सारण, सीवान, वैशाली, मुंगेर, जमुई, भागलपुर, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, अररिया, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिले शामिल हैं.
पोषण मेले का हुआ आयोजन
राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत मनाये जा रहे पोषण माह में आईसीडीएस की ओर से हिंदी भवन में जिलास्तरीय पोषण मेला का आयोजन किया गया. मेले का उद्घाटन जिलाधिकारी कुमार रवि ने किया.
इस दौरान उन्होंने आईसीडीएस के कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा कि अगर बच्चे कुपोषित है तो देश का भविष्य गलत दिशा में जा सकता है. इस कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा योजना, स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्र एवं समाज कल्याण विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है.
जिलाधिकारी ने कहा कि पूरे देश को ओडीएफ करना है, यह पूरे तौर पर स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बात है. ऐसा देखा गया है कि जो भी कुपोषण के शिकार ग्रामीण है, उनमें स्वस्थ्यता की कमी है. वे कितना भी पोष्टिक आहार ले लें किन्तु स्वच्छ वातावरण में नहीं रहते हैं तो कुपोषण के शिकार हो जाते है. गर्भवती माताएं, बहनों एवं बच्चे कुपोषण का ज्यादा शिकार होती हैं. बाल विवाह के परिणाम स्वरूप जो बच्चे जन्म लेते है, वे बच्चे ज्यादातर कुपोषण के शिकार होते है.
जिला स्तरीय पोषण मेला में मेंहदी प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता, हेल्दी बेबी शो, अन्नप्राशन, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक के विजेता बच्चों को जिलाधिकारी ने पुरस्कृत किया. इस अवसर पर जिलाधिकारी के अलावा विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी पंकज कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी पटना सदर, सुहर्ष भगत, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस प्रियम्बदा भारती, जिला जन संपर्क पदाधिकारी अनिल कुमार चौधरी सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे.
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