पटना : तय तिथि पर नहीं लिया गया छात्रों का नामांकन और बाद में एक दिन में ही खत्म कर दी गयी पूरी प्रक्रिया

Updated at : 23 Sep 2018 8:37 AM (IST)
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पटना : तय तिथि पर नहीं लिया गया छात्रों का नामांकन और बाद में एक दिन में ही खत्म कर दी गयी पूरी प्रक्रिया

बीएड नामांकन. पसंद के कॉलेज में सीटें खाली, कोसों दूर के कॉलेज हुए अलॉट पटना : बीएड संयुक्त नामांकन प्रक्रिया में कई अच्छे और मेधावी छात्र भी नामांकन से वंचित रह गये. नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रक्रिया की जा रही थी, लेकिन कुछ कॉलेज अपनी मनमानी कर रहे थे. वे अपने मन मुताबिक एडमिशन ले […]

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बीएड नामांकन. पसंद के कॉलेज में सीटें खाली, कोसों दूर के कॉलेज हुए अलॉट
पटना : बीएड संयुक्त नामांकन प्रक्रिया में कई अच्छे और मेधावी छात्र भी नामांकन से वंचित रह गये. नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रक्रिया की जा रही थी, लेकिन कुछ कॉलेज अपनी मनमानी कर रहे थे. वे अपने मन मुताबिक एडमिशन ले रहे थे. इस चक्कर में कई छात्र नामांकन से वंचित रहे गये.
विवि और कॉलेज की गलती का खामियाजा आज छात्र उठा रहे हैं. फिलहाल नये प्रयोग और संयुक्त परीक्षा के नाम पर हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया. आज वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं. काे-ऑर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी की अपनी सीमाएं थीं और उसने कुछ कानूनी नोटिस भेज कर अपना पल्ला झाड़ लिया. अब जिनके अच्छे मार्क्स भी आये, वे आज कॉलेजों से बाहर हैं.
गलत प्रक्रिया और कॉलेजों की मनमानी के कारण बिना एडमिशन के भटक रहे हैं छात्र
केस एक : 100 किलोमीटर दूर कॉलेज का आवंटन
नालंदा के सुमित रंजन को बीएड-सीईटी में 70 अंक मिले हैं, लेकिन वे भी नामांकन से वंचित हैं. वे कहते हैं कि इस परीक्षा में उत्तीर्ण हुए छात्रों की काउंसेलिंग नालंदा खुला विश्वविद्यालय द्वारा करवायी गयी.
उन्हें आवंटित कॉलेज 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिले में दे दिया गया, जबकि उन्होंने उस कॉलेज का विकल्प भी नहीं दिया था. इतनी दूर रोज आना-जाना संभव नहीं है. इतनी दूर रूम लेकर रहना भी काफी महंगा है, जबकि हम लोगों के पसंदीदा कॉलेज में सीटें खाली हैं. कई छात्रों को उनके रैंक तथा कैटेगरी के अनुसार कॉलेज अलॉट किया गया. जब हमलोग अपने एलॉटेड कॉलेज पहुंचे तो कॉलेज कॉलेज प्रशासन ने नामांकन लेने से इन्कारकर दिया.
केस दो : नामांकन के लिए मिला सिर्फ एक दिन का समय
हिमांशु 83 अंक लाकर और 174 वां स्थान जेनरल से और ओबीसी से 68 स्थान लेकर भी आज बीएड कॉलेज से बाहर है. इसकी गलती कुछ भी नहीं लेकिन यह गलत प्रक्रिया और कॉलेज की मनमानी का शिकार हुआ. गया गवर्मेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में इनका चयन नामांकन के लिए हुआ और तिथि दी गयी 11 अगस्त से नामांकन लिया जायेगा. लेकिन जब ये नामांकन के लिए गये, तो नामांकन नहीं लिया गया. हिमांशु बताते हैं कि फिर कॉलेज ने एक तिथि निकाली, जो 14 अगस्त को शाम में आयी कि नामांकन 17 अगस्त तक लिया जायेगा. 15 अगस्त को छुट्टी थी और 16 अगस्त को नामांकन लिया गया.
17 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर कॉलेज बंद था. एक दिन में जिसने भी नामांकन लिया उसका तो हो गया, लेकिन करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह गयीं. जहां काउंसेलिंग के लिए इतने लंबे समय तक छात्र दौड़ते रहे, लेकिन नामांकन के लिए सिर्फ एक दिन का समय मिला. सुधांशु ने कहा कि मैंनें तो सारी प्रक्रिया को पूरा किया लेकिन समय के अभाव में मैं नामांकन से वंचित रह गया.
दूसरी लिस्ट ही नहीं निकली
इसी तरह अच्छे लाला पटेल के 62 अंक हैं. वे मेरिट में भी थे, लेकिन उन्हें इतनी दूर कॉलेज दे दिया गया कि वे नामांकन नहीं ले सके. उन्हें चाणक्या कॉलेज बेतिया दे दिया गया. बाद में वे दूसरी लिस्ट की आस में थे, जो नहीं निकली. इस तरह से ऐसे सैकड़ों छात्र हैं, जो आज नामांकन से वंचित हैं.
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