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बिहार में फिर से नील की खेती होने का मुद्दा राज्यसभा में उठा, जदयू ने केंद्र से सूखाग्रस्त क्षेत्रों का आकलन कराने की कही बात

Updated at : 26 Jul 2018 2:46 PM (IST)
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बिहार में फिर से नील की खेती होने का मुद्दा राज्यसभा में उठा, जदयू ने केंद्र से सूखाग्रस्त क्षेत्रों का आकलन कराने की कही बात

नयी दिल्ली : अंग्रेजों के शासनकाल में नील की खेती के लिए किसानों को बाध्य किये जाने और इसके विरोध में हुए चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने के बाद एक बार फिर से बिहार में नील की खेती किये जाने का मुद्दा आज राज्यसभा में उठा और सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई […]

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नयी दिल्ली : अंग्रेजों के शासनकाल में नील की खेती के लिए किसानों को बाध्य किये जाने और इसके विरोध में हुए चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने के बाद एक बार फिर से बिहार में नील की खेती किये जाने का मुद्दा आज राज्यसभा में उठा और सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गयी. जदयू के रामचंद्र प्रसाद सिंह ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में किसानों को नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था. नील की खेती की वजह से जमीन की उर्वरकता खत्म हो जाती थी. इसके विरोध में महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह किया था.

जदयू के रामचंद्र प्रसाद सिंह कहा कि आज देश को आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं. लेकिन, अब केरल की एक कंपनी ने फिर से बिहार के आरा जिले के गांवों में नील की खेती शुरू की है. ऐसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि नील की खेती जमीन की उर्वरकता को प्रभावित करेगी. सिंह ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर नील की इस खेती को बंद कराने की मांग की. विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया. भाजपा के श्वेत मलिक ने शून्यकाल में ही फिरोजपुर रेलवे लिंक का मुद्दा उठाया. उन्होने कहा कि कुल 125 किमी लंबा यह ट्रैक अमृतसर को मुंबई से जोड़ेगा.

उन्होंने कहा कि इस लिंक के लिए तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल, भाजपा की गठबंधन सरकार ने भूमि अधिग्रहण शुरू किया था, लेकिन बाद में यह कार्य रोक दिया गया. मलिक ने कहा कि इस लिंक की वजह से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कारोबारियों को लाभ होगा. साथ ही इससे रक्षा क्षेत्र को भी एक वैकल्पिक मार्ग मिलेगा. उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं को देखते हुए भूमि का अधिग्रहण शीघ्र कर इस रेलवे लिंक पर कार्य शुरू करना चाहिए.

जदयू के राम नाथ ठाकुर ने बिहार में अभी तक वर्षा न होने की वजह से उत्पन्न हालात पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि अब तक धान की रोपाई भी बारिश न होने की वजह से शुरू नहीं हो पायी है और किसान के बीज एक तरह से बेकार हो गये. पशुओं के लिए चारे के भी समस्या है. उन्होंने कहा कि बिहार में भू-जल स्तर नीचे चला गया है. इसलिए पंप भी काम नहीं कर पा रहे हैं. ठाकुर ने सरकार से मांग की कि एक केंद्रीय दल को बिहार भेज कर सूखाग्रस्त क्षेत्रों की हालत का आकलन कराये और राज्य के लिए तत्काल राहत मुहैया कराएं.

एनपीएफ के के जी कान्ये ने मेघालय में खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए हानिकारक होते हैं. कुछ रसायनों का उपयोग तो घातक भी होता है. कान्ये ने मांग की कि केंद्र सरकार को एक उच्च स्तरीय जांच समिति बना कर इस मामले की जांच कराएं. माकपा सदस्य के सोमप्रसाद ने लोको पायलट की कमी होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि ट्रेनों के लिए हमेशा ही लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की जरूरत होती है, लेकिन इनकी कमी है. इसकी वजह से कार्यरत लोको पायलट और सहायक लोको पायलट पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और काम पर भी असर पड़ता है. उन्होंने मांग की कि रेलवे बोर्ड को शीघ्र ही इस समस्या का हल निकालना चाहिए.

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