सुर व ताल पर झूमे दर्शक, बिहारी लोकनृत्य व भोजपुरी लोकगीत की हुई प्रस्तुति
Updated at : 22 Jul 2018 3:56 AM (IST)
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पटना : देशी भाषा में जमीन से जुड़े गीत हो और उसी देशी भाषा में लोकनृत्य का आयोजन हो तो भला दर्शकों को झूमने से कौन रोक सकता है. शनिवार को श्रोता इसी खूबसूरत गीत व संगीत की शाम के गवाह बने, जब भारतीय नृत्य कला मंदिर में शनि बहार कार्यक्रम के तहत बिहार का […]
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पटना : देशी भाषा में जमीन से जुड़े गीत हो और उसी देशी भाषा में लोकनृत्य का आयोजन हो तो भला दर्शकों को झूमने से कौन रोक सकता है. शनिवार को श्रोता इसी खूबसूरत गीत व संगीत की शाम के गवाह बने, जब भारतीय नृत्य कला मंदिर में शनि बहार कार्यक्रम के तहत बिहार का लोकनृत्य और भोजपुरी लोकगीत की प्रस्तुति दी गयी. कार्यक्रम में लोकनृत्य को दरभंगा के राजन कुमार सिंह तथा लोकगीत को छपरा के अतुल कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया. इस मौके पर बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे.
आयोजन में पहले प्रस्तुति देते हुए गायक अतुल कुमार सिंह ने सोहर के रूप में भादो के अंधेरी रात पावन को पेश किया. इसके बाद उन्होंने बधाई गीत के रूप में गोकुल नगरिया में बाजेला बधईयों को पेश किया. दो अलग-अलग तरह के गीतों को सुनकर लोगों ने खूब तालियां बजायी. इसके बाद अपनी अगली प्रस्तुति देते हुए उन्होंने कजरी की प्रस्तुति देते हुए झूले रामचंद्र रघुरइयां देख चारो भइया ना, देशभक्ति गीत के रूप में बाबू लेले जइह हमरो सामान हो, पूछिहे जवान सुगना को पेश किया.
इन दाेनों गानों को भी खूब सराहना मिली. इसके बाद उन्होंने लोकगीत के रूप में गांव ही में रहे के विचार बा, जन्मेला संसार हमरा से को पेश किया. इसके बाद उन्होंने दहेज गीत लागेला की बबुनी कुंवार रह जइहे, शराबबंदी पर आधारित जबसे नीतीश जी कईले बंद शराब हो तथा बेटी बचाओ पर बेटा के चाहत में बेटी मराली को पेश किया.
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