छत्तीसगढ़ में भी बन रहा शराबबंदी का माहौल, 11 सदस्यीय दल कर रहा बिहार पैटर्न का अध्ययन

Updated at : 29 Jun 2018 8:53 PM (IST)
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छत्तीसगढ़ में भी बन रहा शराबबंदी का माहौल, 11 सदस्यीय दल कर रहा बिहार पैटर्न का अध्ययन

पटना : बिहार में शराबबंदी का डंका आज भी पूरे देश में बजा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फौसले ने कई लोगों को प्रभावित किया है. प्रभावित होने वाले लोगों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी शामिल है. यह कारण है कि आज उन्होंने छत्तीसगढ़ से 11 सदस्यीय अध्ययन दल को बिहार भेजा है. […]

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पटना : बिहार में शराबबंदी का डंका आज भी पूरे देश में बजा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फौसले ने कई लोगों को प्रभावित किया है. प्रभावित होने वाले लोगों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी शामिल है. यह कारण है कि आज उन्होंने छत्तीसगढ़ से 11 सदस्यीय अध्ययन दल को बिहार भेजा है.

इस दल ने यहां पहुंच कर मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह से मुलाकात की और शराबबंदी से संबंधित तमाम जानकारियांजुटाई़ दरअसल, इस दल की मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से होनी थी. वह अस्वस्थ थे. इस कारण परामर्शी अंजनी कुमार सिंह से मिले. पटना आए अध्ययन दल के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि हमारे राज्य के मुख्यमंत्री भी शराबबंदी के पक्ष में हैं और इसके लिए एक वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

बिहार में लागू मद्य निषेध की नीति, उसका क्रियान्वयन एवं प्रभाव का अध्ययन करने के लिए आये आये छत्तीसगढ़ के 11 सदस्यीय अध्ययन दल में बस्तर के सांसद दिनेश कश्यप, जंजगीर चंपा की सांसद कमला देवी पटेल, कवर्धा के विधायक अशोक साहू, कुनकुरी के विधायक रोहित कुमार साईं, छत्तीसगढ़ सरकार के उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव डीडी सिंह आदि शामिल हैं.

अंजनी सिंह ने बताया कि सरकार ने यह विचार किया कि शराबबंदी को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाये. 1 अप्रैल 2016 को राज्य में शराबबंदी लागू हो गयी. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में देसी एवं विदेशी दोनों तरह की शराब की बिक्री एवं सेवन को रोक लगायी गयी. शहरी क्षेत्रों में भी सिर्फ विदेशी शराब बेचने की इजाजत रही. लेकिन शहरों में महिलाओं, बच्चों एवं सभी वर्ग के लोगों ने इसका विरोध किया. यह देखने के बाद 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी पूरे बिहार में लागू कर दी गयी.

सड़क हादसों और पारिवारिक हिंसा में आयी कमी

मुख्यमंत्री के परामर्शी ने कहा कि शराब के कारोबार से राज्य को पांच हजार करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती थी. अगर पांच हजार करोड़ रुपये सरकार को राजस्व के रूप में आमदनी हो रही थी तो 10-15 हजार करोड़ रुपये लोगों का शराब में खर्च हो रहा होगा. आज लोग उन पैसों का उपयोग अच्छे कामों के लिये कर रहे हैं. शराबबंदी से जुड़े लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था भी सरकार करती है. शराबबंदी से पारिवारिक हिंसा में कमी आयी है. सड़क हादसों में कमी आयी है.

छत्तीसगढ़ के अध्ययन दल ने बिहार में लागू शराबबंदी के अध्ययन के लिए कई क्षेत्रों का दौरा भी किया. अध्ययन दल ने बताया कि हर जगह की महिलाओं ने इसकी काफी प्रशंसा की है. शराबबंदी से हो रहे फायदों के बारे में बताया है. विचार–विमर्श के बाद मुख्यमंत्री के परामर्शी ने अध्ययन दल के सभी सदस्यों को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया.

अध्ययन दल ने 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प सभागार में मुलाकात के दौरान शराबबंदी से संबंधित तमाम पहलुओं पर चर्चा की. अध्ययन दल को विस्तार से शराबबंदी को राज्य में लागू करने के दौरान किये गये प्रयासों को साझा किया. इस दौरान प्रधान सचिव मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, विनय कुमार, मनीष कुमार वर्मा सहित मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अन्य पदाधिकारी तथा जीविका के प्रतिनिधि गण थे.

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