''दिल की बात'' में तेजस्वी ने बड़े भाई की सगाई में पिताजी की अनुपस्थिति पर लिखी भावुक चिट्ठी

Published at :20 Apr 2018 8:05 AM (IST)
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''दिल की बात'' में तेजस्वी ने बड़े भाई की सगाई में पिताजी की अनुपस्थिति पर लिखी भावुक चिट्ठी

पटना : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की सगाई के मौके पर पिता की अनुपस्थिति पर भावुक चिट्ठी लिख कर अपनी व्यथा जाहिर की है. फेसबुक पोस्ट पर ‘दिल की बात’ लिखते हुए उन्होंने यह चिट्ठी गुरुवार […]

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पटना : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की सगाई के मौके पर पिता की अनुपस्थिति पर भावुक चिट्ठी लिख कर अपनी व्यथा जाहिर की है. फेसबुक पोस्ट पर ‘दिल की बात’ लिखते हुए उन्होंने यह चिट्ठी गुरुवार को साझा की. साथ ही उन्होंन एक तस्वीर भी साझा की है. इस तस्वीर में तेजस्वी यादव के साथ उनके बड़े भाई और उनकी होनेवाली भाभी ऐश्वर्या के साथ उनकी मां राबड़ी देवी हैं.

मालूम हो कि बीते 18 अप्रैल, बुधवार को बड़े भाई तेज प्रताप की राजधानी स्थित होटल मौर्या में पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद सिंह की पुत्री ऐश्वर्या के साथ सगाई हुई. चारा घोटाले में झारखंड स्थित बिरसा मुंडा जेल में बंद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद दिल्ली के एम्स में इलाज कराने के कारण सगाई के मौके पर उपस्थित नहीं हो सके. तेज प्रताप की सगाई में परिवार के लोगों के साथ खास मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया था.

तेजस्वी यादव ने लिखा… “दिल की बात : तेज भाई की सगाई और पिता जी की अनुपस्थिति”

हम सभी नौ भाई-बहनों ने जीवन के हर सफर की शुरुआत हमेशा हमने पिताजी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेकर ही की है, लेकिन कल (बुधवार को) मन थोड़ा व्यथित था कि तेज भाई के नये सफर की शुरुआत में उनका विराट व्यक्तित्व शारीरिक रूप से खुशी की घड़ी में हमारे साथ शरीक नहीं था.

सुख के क्षणों में हमने पिता की कमी महसूस की. हालांकि, मानसिक और वैचारिक रूप से सदैव वो हमारे अंग-संग रहते हैं.

बचपन से सुनते आया हूं, वो हमें अक्सर कहते हैं, जो जनसेवा को समर्पित हो, उसका कोई निजी जीवन नहीं होता, निजी खुशियां नहीं होती, निजी दुःख नहीं होता. जन-जन के संघर्ष के आगे परिवार की खुशियों का कोई मोल नहीं है. भाई के सगाई समारोह में पिताजी की यही बात बार-बार याद आ रही थी. भाई के नये सफर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ उनके सिर पर नहीं था, ये शायद पहली बार था. पिता की कमी बहुत खली, लेकिन उनकी ये सीख हमारे साथ रही कि निजी सुख-दुःख से ऊपर होकर हमारा जीवन बिहार के लिए समर्पित है और रहेगा.

कई बार समझौते आपको और आपके परिवार को सुकून के पल और खुशियां दे जाते हैं. मेरे पिता ने आवाम के हितों से कभी समझौता नहीं किया. विकट से विकट परिस्थिति में भी अपने विचार, नीति और सिद्धांत को नहीं छोड़ा और यही कारण है कि सुखद क्षण में वो हमारे साथ नहीं है.

मुझे गर्व की अनुभूति होती है कि मैं एक ऐसे पिता का बेटा हूं, जिसने अपना जीवन बिहार के लिए, बिहार के लोगों के लिए, शोषितों, पीड़ितों, वंचितों और दबे-कुचलों के लिए समर्पित कर दिया, जिसे जेल जाना मंजूर था, लेकिन झुकना नहीं.

बिहार की इस संघर्ष यात्रा में खुशी के पल भी कुछ उदास हैं, लेकिन हमारे साथ हमारे पिताजी का दिया आत्मबल और विश्वास है. हम भी साधारण इंसान हैं. इसलिए दुख हुआ, लेकिन बिहार के लोगों के मान-सम्मान की लड़ाई में यह दुख बहुत छोटा पड़ गया.

सत्यमेव जयते.

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