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लालू की बढ़ सकती हैं मुश्किलें : चारा घोटाले के एक और मामले में इस महीने आ सकता है फैसला

Updated at : 09 Jan 2018 8:22 PM (IST)
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लालू की बढ़ सकती हैं मुश्किलें : चारा घोटाले के एक और मामले में इस महीने आ सकता है फैसला

रांची : चारा घोटाले के देवघर कोषागार से जुड़े एक मामले में सजा पाने के बाद यहां बिरसा मुंडा जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं क्योंकि चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये के गबन के एक अन्य […]

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रांची : चारा घोटाले के देवघर कोषागार से जुड़े एक मामले में सजा पाने के बाद यहां बिरसा मुंडा जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं क्योंकि चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये के गबन के एक अन्य मामले में भी बहस पूरी हो गयी है और जनवरी के अंत तक इसमें भी फैसला आ सकता है.

सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा के यहां स्थित एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये फर्जी ढंग से निकालने से संबद्ध आरसी 68ए96 मामले में भी सीबीआई के विशेष न्यायाधीष स्वर्ण शंकर प्रसाद की अदालत में बहस पूरी हो गयी है और इस मामले में कल फैसला सुरक्षित हो जाने की संभावना है.

यदि अदालत इस मामले में कल फैसला सुरक्षित कर लेती है तो जनवरी माह में ही इस मामले में भी फैसला आ जाने की पूरी संभावना है. इससे पूर्व अभी छह जनवरी को रांची में ही सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने लालू यादव को देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी.

950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुडे देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को जहां साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख जुर्माने की सजा सुनायी गयी वहीं उनके दो पूर्व सहयोगी लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात वर्ष की कैद एवं बीस लाख रुपये जुर्माना एवं बिहार के पूर्व मंत्री आरके राणा को साढ़े तीन वर्ष की कैद एवं दस लाख रुपये जुर्माने की सजा विशेष सीबीआई अदालत ने सुनायी. जिसके बाद जमानत के लिए उनके पास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं बचा है.

सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि देवघर कोषागार से फर्जीवाड़ा करके अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद यादव एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13-1(डी) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज किया था.

लालू प्रसाद प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले से जुड़े कुल पांच मामलों में रांची में मुकदमे चल रहे थे. जिनमें चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में उन्हें तथा जगन्नाथ मिश्रा को 30 सितंबर, 2013 को दोषी ठहराये जाने के बाद3 अक्तूबर को क्रमश: पांच वर्ष कैद, 25 लाख रुपये जुर्माने एवं चार वर्ष कैद की सजा सुनायी जा चुकी है.

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले में यह दूसरा ऐसा मामला है जिसमें सजा सुनायी गयी है. इस आदेश के आने के बाद अब लालू बीचुअल आफेंडर की श्रेणी में आ गये हैं. इसके अलावा उनके खिलाफ रांची में डोरंडा कोषागार से 184 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी से जुड़ा मामला, दुमका कोषागार से तीन करोड़, 97 लाख रुपये निकासी का मामला एवं चाईबासा कोषागार से अवैध रूप से 35 करोड़, 62 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा मामले के मुकदमे चल रहे हैं जिनकी सुनवाई अंतिम दौर में है.

जहां चाईबासा मामले में इस माह ही फैसला हो जाने की संभावना है, वहीं दुमका कोषागार से जुड़े मामले में भी गवाहियां लगभग पूरी हो गयी हैं और इस मामले में भी फरवरी में फैसले की उम्मीद की जा सकती है. केवल डोरंडा कोषागार से फर्जीवाड़ा करके 184 करोड़ रुपये गबन करने के मामले में चूंकि सौ से अधिक गवाहों की गवाही होनी है लिहाजा उसमें कुछ समय लग सकता है.

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