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बिहार : DIG ने की कार्रवाई, 70 थानेदारों की सैलरी रोकी, जानें क्‍या है पूरा मामला

Updated at : 01 Dec 2017 7:03 AM (IST)
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बिहार : DIG ने की कार्रवाई, 70 थानेदारों की सैलरी रोकी, जानें क्‍या है पूरा मामला

क्राइम कंट्रोल : पुलिस हुई फेल, डीआईजी ने की कार्रवाई पटना : क्राइम कंट्रोल में पटना पुलिस फेल हो रही है. खास कर थाना स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार जैसे मामलों में न तो गिरफ्तारी हो रही है और न ही केस का अनुसंधान. इस पर पटना रेंज […]

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क्राइम कंट्रोल : पुलिस हुई फेल, डीआईजी ने की कार्रवाई
पटना : क्राइम कंट्रोल में पटना पुलिस फेल हो रही है. खास कर थाना स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार जैसे मामलों में न तो गिरफ्तारी हो रही है और न ही केस का अनुसंधान. इस पर पटना रेंज के डीआईजी राजेश कुमार ने बीते एक सप्ताह की रिपोर्ट मांगी थी.
रिपोर्ट चौंकाने वाले निकले. जिले के 70 थानेदारों ने अपने थानों में दर्ज कांडों के एक भी आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया है, जबकि पेंडिंग केस की लंबी फेहरिस्त है. इससे बेहद नाराज डीआईजी ने तत्काल प्रभाव से सभी 70 थानों के थानेदारों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है. इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. जिन थानेदारों के वेतन रोके गये हैं, उसमें पटना टाउन का मात्र एक थाना कदमकुआं ही कार्रवाई की लिस्ट से बाहर है.
परफॉर्मेंस में अव्वल निकले कुछ थानेदार : डीआईजी की इस अग्निपरीक्षा में सिर्फ तीन थानेदार ही पास हो पाये हैं. इनमें गौरीचक, फुलवारीशरीफ और कदमकुआं के थानेदार शामिल हैं. इन तीनों के कार्य प्रगति पर पाये गये. इनको छोड़ कर सभी थानेदार फेल हो गये, जबकि सभी थानों में गंभीर अपराध के केस में पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. हालांकि थाना स्तर से कार्रवाई नहीं होने को लेकर पहले भी सवाल खड़े होते रहे हैं.
डीआईजी ने थानेदारों के अलावा 10 डीएसपी रैंक के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की है. डीएसपी रैंक के पदाधिकारियों पर मॉनीटरिंग में लापरवाही पायी गयी है. कुछ मामलों में सुपरविजन दिये जाने में भी सुस्ती पायी गयी है.
इसके लिए पटना जिले के 10 डीएसपी को शो कॉज किया गया है. उनसे इस संबंध में जवाब मांगा गया है. डीआईजी राजेश कुमार की यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ते अपराध की वजह से की गयी है.
फरियादियों की बढ़ती संख्या के बाद लिया गया फैसला : दरअसल रोज पुलिस पदाधिकारियों के यहां बढ़ रही फरियादियों की संख्या से ही यह माना जाता है कि थाने पर सुनवाई नहीं हो रही है. इसलिए लोग एसएसपी से लेकर डीआईजी तक चक्कर लगाते हैं. एक अनुमान के तहत प्रतिदिन करीब 60 से 70 आवेदन एसएसपी से लेकर डीआईजी स्तर के अधिकारियों के पास आते हैं. इन सबको देखते हुए डीआईजी ने थानों की माॅनीटरिंग की.
20 साल से अनुत्तरित हैं हत्या, लूट, डकैती के 719 केस, सुपरविजन की ढिलाई से तफ्तीश में लगा ब्रेक
विजय सिंह
पटना : हत्या, लूट डकैती, बलात्कार जैसी घटनाओं के बाद अगर 20 सालों तक पुलिस तफ्तीश के नाम पर कुछ नहीं कर पायी हो तो सारे दावे बेमानी लगते हैं. पटना जिले का हाल भी कुछ ऐसा ही है. वारदात हुए सालों गुजर गये लेकिन पुलिस इन गंभीर अपराधों की गुत्थी को नहीं सुलझा सकी है. केस पेडिंग में हैं और परिवारिजन के न्याय का इंतजार भी धराशायी हो रहा है.
हालत यह है कि वर्ष 1997 से लेकर 2016 तक के बीच हुई घटनाअों में 719 ऐसे मामले हैं जिनका अनुंसधान नहीं हो सका है. कुछ केस में पुलिस ने केस डायरी में एक लाइन भी नहीं लिखा है. ऐसे में अपराधियों के हौसले तो बढ़े ही हैं, पुलिस के इकबाल पर भी खतरा साफ दिखता है. वर्ष 2017 में भी जनवरी से लेकर सितंबर तक केस के अनुसंधान की पेडिंग सूची देखें तो आंकड़ा 363 तक पहुंच गया है. अधिकारियों ने मीटिंग में जिम्मेदाराें को जमकर फटकार लगायी है लेकिन पेडिंग से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है.
कार्रवाई के लिए आवेदन लेकर फरियादी काटते रहते हैं चक्कर : कभी थाना, कभी डीएसपी, कभी एसपी के दफ्तर का चक्कर लगाने वाले फरियादियों के आवेदन पुराने हो जाते हैं लेकिन न तो उस पर सुनवाई हो पाती है और न ही वक्त पर कार्रवाई. सबकुछ कागजी खानापूर्ति में उलझ कर रह जा रहा है. पुलिस के वरीय अधिाकरी हाईप्रोफाइल केसया फिर चर्चित कांड पर तो फोकस रखते हैं लेकिन सुदूर इलाक में होने वाली बड़ी घटनाओं से परदा नहीं उठा पाते.
सुपर विजन के लिए भी अधिकारियों के दफ्तर में पेडिंग हैं केस :
एससीएसटी, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न, दंगा जैसे मामलों में केस का सुपरविजन वक्त पर नहीं हो पा रहा है. एसपी, डीएसपी स्तर के अधिकारी भी ढिलाही बरत रहे हैं. ऐसे में केस के आइओ आगे का अनुसंधान नहीं कर पा रहे हैं. पटना जिले में कई अनुमंडल तो ऐस हैं जहां सुपरविजन के लिए केस की पेडेंसी बहुता ज्यादा है. जैसे सदर, दानापुर, पटना सिटी, फुलवारी अनुमंडल में केस ज्यादा पेडिंग है.
वर्ष 1997 से लेकर 2016 तक लंबित अनुसंधान
हत्या : 284, डकैती : 89, लूट : 143, गंभीर दंगा : 08, फिरौती के लिए अपहरण : 06, एससीएसटी : 121, महिला अत्याचार : 68, कुल : 719
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