राजद की महारैली : निशाने पर नीतीश व भाजपा, 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का एलान
Updated at : 28 Aug 2017 8:39 AM (IST)
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पटना : मुकदमों के चक्रव्यूह में फंसे लालू कुनबे के न्योते पर रविवार को ऐतिहासिक गांधी मैदान में विपक्षी नेताओं की जुटान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन का संकेत दिया है. राजद की ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ महारैली’ में बसपा को छोड़ कर 17 विपक्षी दलों के नेता एकत्र हुए. निशाने पर […]
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पटना : मुकदमों के चक्रव्यूह में फंसे लालू कुनबे के न्योते पर रविवार को ऐतिहासिक गांधी मैदान में विपक्षी नेताओं की जुटान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन का संकेत दिया है. राजद की ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ महारैली’ में बसपा को छोड़ कर 17 विपक्षी दलों के नेता एकत्र हुए. निशाने पर भाजपा रही.
राज्य में महागठबंधन छोड़ भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार पर भी विपक्षी नेताओं के तीर चलते रहे. राजद की रैली 20 महीने बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्ष के बनने वाले फोरम का एहसास भी करा गयी. लालू प्रसाद के साथ आने की ममता बनर्जी की खुल कर घोषणा और जदयू से बागी होकर शरद यादव के राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के एलान ने 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के मुकाबले व्यापक मंच तैयार करने का साफ संकेत दिया.
रैली में लालू प्रसाद ने भाजपा को ललकारते हुए 2019 के चुनाव में उसके सफाये की घोषणा की. रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रिकाॅर्ड किये गये भाषण को सुनाया गया. वहीं, उपाध्यक्ष राहुल गांधी का लिखित भाषण पढ़ा गया. जदयू के बागी नेता शरद यादव ने एलान किया कि जब तक हलक में अंतिम सांस है, संग्राम जारी रहेगा. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का एलान किया.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर लालू परिवार समेत विपक्षी नेताओं पर मुकदमा कराने का आरोप लगाया. रैली में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश प्रसाद यादव, झारखंड के पूर्व सीएम बाबू लाल मरांडी और हेमंत सोरेन, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद, भाकपा के नेता डी राजा, जनता दल एस, इंडियन रालोद और द्रमुक के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. हालांकि, इसमें बसपा का कोई प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ.
रैली में लालू कुनबा पूरी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर बना रहा. सबके भाषण के अपने निराले अंदाज थे. उनके भाषणों में सत्ता से बेदखल होने की टीस साफ झलकती रही.
मुखिया लालू प्रसाद ने महागठबंधन के बनने और बिगड़ने की कहानी बयां की. राबड़ी देवी के चेहरे पर तेजप्रताप के खिलाफ मुकदमे का गुस्सा साफ झलकता रहा. सरकार में 20 महीने साथ काम कर चुके तेजस्वी यादव ने जहां नीतीश कुमार को ‘चाचा’ कह राजनीतिक आलोचना की, वहीं एक नये अवतार में नजर आये लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप ने सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री और भाजपा के खिलाफ जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
आसमान में छाये बादल ने भी रैली समर्थकों का साथ दिया. आम तौर पर दोपहर की धूूप परेशान करने वाली होती, लेकिन रविवार की दोपहर आसमान में बादल छाये रहे.
अपने भाषण में लालू प्रसाद ने घोषणा की कि हमारी सरकार आयेगी, तो सातवां पास को सिपाही बहाली में मौका मिलेगा. यही नहीं ताड़ी को फिर से चालू किया जायेगा. उन्होंने सुझाव दिया था कि सरकारी ठेके में 50% आरक्षण दिया जाये.
सृजन घोटाले की चर्चा करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि इसमें बीजेपी किसान सेल का अध्यक्ष विपिन कुमार, शाहनवाज हुसैन और गिरिराज सिंह शामिल हैं.
इस घोटाले में एक व्यक्ति महेश मंडल को मार दिया गया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंच पर आने पर लालू प्रसाद ने खुद ममता दीदी जिंदाबाद का नारा लगाया. राजद की रैली के बीच कई बार हल्ली फुहार पड़ी और मौसम को और सुहावना बना दिया.
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