राजधानी एक्सप्रेस की सीटों पर कब्जा किसका ? आरक्षण के वक्त मात्र एक सीट उपलब्ध, यात्रा के दौरान खाली रहीं सीटें

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : ट्रेन में आरक्षण की 'आदर्श' स्थिति आज तक बहाल नहीं की जा सकी है. कितने रेलमंत्री आये और चले गये. कितने नियम बने. दलालों पर अंकुश लगाने के लिए सीसीटीवी से लेकर कई कड़े कदम उठाये गये. सुरक्षा बलों की तैनाती से लेकर छापेमारी तक हुई. अब रेलवे की ओर से टीटीई को हैंड हेल्ड मशीन दिये जाने की बात कही गयी है. ताकि, चलती ट्रेन में हैंड हेल्ड मशीन के जरिये खाली सीटों की जानकारी प्राप्त की जा सके. इसके बावजूद भारतीय रेल में आरक्षण की 'आदर्श' स्थिति आज तक बहाल नहीं की जा सकी है.

राजधानी एक्सप्रेस की सीटों पर कब्जा किसका ? आरक्षण के वक्त मात्र एक सीट उपलब्ध, यात्रा के दौरान खाली रहीं सीटें

नयी दिल्ली से पटना आ रही प्रियंका सिंह राजपूत ने फेसबुक पेज पर तस्वीरें पोस्ट कर रेलवे की खामियों और सीटों के आरक्षण घोटाले की तस्वीर पेश की है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि उन्हें अचानक पटना जाने की जरूरत आ पड़ी. जब वह ट्रेनों में सीटों की स्थिति की पड़ताल की, तो उन्हें बमुश्किल नयी दिल्ली-पटना राजधानी एक्सप्रेस के सेकेंड एसी में एक सीट खाली मिली. बिना कुछ सोचे उन्होंने फौरन अपना रिजर्वेशन करा लिया, ताकि पटना तक की यात्रा आराम से तय की जा सके.

राजधानी एक्सप्रेस की सीटों पर कब्जा किसका ? आरक्षण के वक्त मात्र एक सीट उपलब्ध, यात्रा के दौरान खाली रहीं सीटें

राजधानी ट्रेन के सेकेंड एसी में करीब 52 सीटें होती हैं. लेकिन, जब वह ट्रेन में सफर कर रही थीं, तो मात्र पांच यात्री ही सफर करते मिले. जब उन्होंने वेंडर ब्वॉय से बात की, तब उसने कहा कि ''दीदी जी, यह लगभग हर कंपार्टमेंट का हाल है. हर रोज ऐसा ही नजारा होता है.'' यह जानने के बाद प्रियंका सिंह राजपूत ने एसी थ्री की ओर रुख किया. वहां भी उन्हें तकरीबन यही स्थिति देखने को मिली. वहां भी यात्री गिने-चुने ही थे. उसके बाद प्रियंका को अखरने लगा कि एसी थ्री के खाली रहते हुए भी एसी टू कोच में रिजर्वेशन मजबूरी में कराना पड़ा. उन्होंने यह भी लिखा है कि आरक्षित टिकट के लिए करीब 3500 रुपये खर्च किये. जबकि, पटना राजधानी का नयी दिल्ली से एसी टू का किराया जीएसटी सहित मात्र 2300 रुपये है. वहीं, एसी थ्री का किराया 1665 रुपये है. प्रियंका जहां 1665 रुपये में पटना तक कि यात्रा कर सकती थी, वहीं उन्हें पटना तक आने के लिए 3500 रुपये खर्च करने पड़े. यानी, दोगुने से भी ज्यादा.

राजधानी एक्सप्रेस की सीटों पर कब्जा किसका ? आरक्षण के वक्त मात्र एक सीट उपलब्ध, यात्रा के दौरान खाली रहीं सीटें

अंत में उन्होंने देश की हर पिछली सरकारों, रेल व्यवस्था, प्रधानमंत्री और रेलमंत्री को धन्यवाद भी दिया है कि रेलवे की आरक्षण प्रणाली और दलाल के कब्जे के कारण आम आदमी की जरूरत-मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है और आरक्षित प्रणाली में सुधार की गुंजाइश दिखती नजर नहीं आ रही है.

नयी दिल्ली-पटना राजधानी ट्रेन में आज से अगले एक सप्ताह की स्थिति

राजधानी एक्सप्रेस की सीटों पर कब्जा किसका ? आरक्षण के वक्त मात्र एक सीट उपलब्ध, यात्रा के दौरान खाली रहीं सीटें

नयी दिल्ली-पटना राजधानी ट्रेन में एसी-2 और एसी-3 के किराये

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