राजकीय नलकूप ठीक नहीं कराने वाले नपेंगे मुखिया, सरकार कर रही है इसकी तैयारी, 30 फीसदी पर है ये गंभीर आरोप

Published at :16 Oct 2022 1:10 PM (IST)
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राजकीय नलकूप ठीक नहीं कराने वाले नपेंगे मुखिया, सरकार कर रही है इसकी तैयारी, 30 फीसदी पर है ये गंभीर आरोप

खराब राजकीय नलकूप को लेकर सरकार सख्त हो गई है. मुखिया पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है. 30 फीसदी मुखिया पर यह आरोप है कि उन्होंने राजकीय नलकूप ठीक करने के लिए विभाग से पैसे मिलने के बावजूद नलकूप ठीक नहीं करवाया.

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पटना. राज्य में खराब राजकीय नलकूप ठीक नहीं करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं देने वाले मुखिया पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. इसके लिए लघु जल संसाधन विभाग ने सभी डीएम को निर्देश जारी किया है. इसके तहत राज्य के करीब 30 फीसदी मुखिया पर यह आरोप है कि उन्होंने राजकीय नलकूप ठीक करने के लिए विभाग से पैसे मिलने के बावजूद नलकूप ठीक नहीं करवाया. साथ ही उस पैसे का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी नहीं दिया. राजकीय नलकूपों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी मुखिया को सौंप दी गयी है.

6376 नलकूप थे खराब

सूत्रों के अनुसार इससे पहले राजकीय नलकूपों को ठीक करने को लेकर इस साल भी कई बैठकें हो चुकी हैं. इसके बावजूद अब भी बड़ी संख्या में नलकूपों को खराब होने और इससे सिंचाई बाधित होने की शिकायत मिल रही थी. राज्य में राजकीय नलकूप करीब 10 हजार 240 हैं. बता दें कि 21 फरवरी, 2022 तक 6376 नलकूप खराब थे. केवल 3864 नलकूपों से सिंचाई का काम हो रहा था. सरकारी नलकूपों के खराब होने के कारणों में बताया गया है कि कुछ नलकूपों के उपकरण गायब हैं. वहीं ,कुछ नलकूपों के पंप गिर गये हैं. कहीं मोटर खराब हैं. ऐसे में मरम्मत की अभाव में नलकूपों के खराब होने से सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है.

आहर-पइन की मरम्मत की तैयारी

लघु जल संसाधन विभाग ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य में आहर-पइन और चेकडैम की मरम्मत और निर्माण की तैयारी की है. इसके तहत हाल ही में आरा और मुजफ्फरपुर जिले के आहर-पइन की मरम्मत के लिए निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू की गयी है. साथ ही अन्य जिलों के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है. वहीं, सूत्रों के अनुसार सिंचाई सहित राज्य का ग्राउंड वाटर लेवल बेहतर करने के लिए पठारी इलाकों में गारलैंड ट्रेंच बनाने की तैयारी तेजी से चल रही है. कई जगह काम शुरू हुआ है. इसके लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने दक्षिण बिहार के कई जिलों की पहचान कर वहां की योजना तैयार की है.

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