मेड़ों पर पेड़ लगा कर बढ़ाएं आमदनी
Updated at : 22 Aug 2016 3:27 AM (IST)
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वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण देकर दिया जाता है बढ़ावा अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन नवादा कार्यालय : जिले में उद्योग धंधों का अभाव है, साथ ही सूखे की चपेट में आने से खेती-बाड़ी भी चौपट हो जाती है. क्षेत्र के पिछड़ेपन की एक बड़ी वजह यह भी है. कई सालों से लगातार सूखे की […]
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वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण देकर दिया जाता है बढ़ावा
अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन
नवादा कार्यालय : जिले में उद्योग धंधों का अभाव है, साथ ही सूखे की चपेट में आने से खेती-बाड़ी भी चौपट हो जाती है. क्षेत्र के पिछड़ेपन की एक बड़ी वजह यह भी है. कई सालों से लगातार सूखे की मार झेल रहे किसान वैकल्पिक खेती अपना कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं. किसानों का बड़ा तबका पारंपरिक खेती पर निर्भर करता हैं. ऐसे में अनियमित मौसम के कारण फसल बरबाद हो जाते हैं और किसानों की हालात पतली हो जाती हैं. इन स्थितियों में किसान बदलते जमाने के अनुसार खेती-बाड़ी में बदलाव लाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.
अपनी खेतों में, उसकी मेड़ों पर व बागानों में कई प्रकार के पौधे लगा कर खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं. इनमें इमारती लकड़ियों, फलदार, फूलदार व जड़ी बूटियों के पौधे शामिल हैं. इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार कृषि वानिकी योजना चला रही हैं. योजना के तहत किसानों को वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षण व मार्गदर्शन देकर बढ़ावा दिया जाता हैं. किसानों की जमीन पर लगे पेड़ उनका मालिकाना हक होता है, इनको बेच कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.
क्या है कृषि वानिकी योजना : कृषि वानिकी के तहत किसान खेतों में फसल उगाने के साथ बची जमीन पर पेड़ लगा कर जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं. फसल की खेती के साथ कुछ जमीन पर और खेतों के मेड़ों पर पेड़ लगाया जाता हैं. इससे कम जमीन में भी ज्यादा फायदा कमाया जा सकता है. पेड़ों से मिट्टी की कटाई पर रोक लगता है. पेड़ों के गिरने वाले पत्ते सड़ कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं. क्षेत्र में पर्याप्त पेड़ होने पर वर्षा भी सही समय पर होती है. लेकिन किसानों में आमधारणा होती है कि मेड़ों पर के पेड़ फसलों की सिंचाई में लगनेवाले पानी का उपयोग कर वृद्धि करते हैं. इससे फसलों की पैदावार काम हो जाती हैं. लेकिन
पर्यावरण व वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र की मिट्टी व आबोहवा को जानकर पौधों के चुनाव से इन समस्याओं से बचा जा सकता हैं. किसानों को जल्दी बढ़नेवाले, गहरी जड़ोंवाले व सीधे तने के पेड़ों का चुनाव करना चाहिए. द्विदलीय पौधों जैसे शीशम को लगा कर खेतों में नाइट्रोजन की कमी को दूर किया जा सकता है.
100 पौधे लगाने की हो भूमि : सरकार की इस योजना के तहत किसानों को मुफ्त में पौधे दिये जाते हैं. इसके लिए किसान के पास अपनी जमीन होनी चाहिए. योजना का लाभ लेनेवाले आवेदक को कम से कम 100 पौधे लगाने के लायक जमीन होनी चाहिए. एक पौधे की रोपाई के लिए दो मी लंबाई व दे मी चौड़ाई की जमीन चाहिए. इससे कुल 400 वर्गमी से 600 वर्गमी क्षेत्रफल के भूखंड की जरूरत होती है. किसान पौधों को खेत की मेड़ों पर भी लगा सकते हैं.
वित्तीय सहायता देकर किया जाता है प्रोत्साहित : किसानों को पौधारोपण व पौधों की देखभाल के लिए तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाता हैं. जमीन व जलवायु के अनुसार पौधे की रोपाई, देखभाल, कंटाई, छंटाई, ब्रीडिंग आदि के लिए किसानों को कार्यशालाएं आयोजित करके जानकारी दी जाती हैं. साथ ही पौधों को अच्छी तरह देखभाल करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती हैं. विभाग द्वारा राशि आवेदक के खाते में सीधे भेज दी जाती हैं. एक पौधे की देखभाल के लिए पहले साल के अंत में 10 रुपये, दूसरे साल के अंत में 10 रुपये व तीसरे साल के अंत में 15 रुपये के हिसाब से दिया जाता है.
आवेदन करना है सरल
कृषि वानिकी योजना के तहत किसानों को सागवान, शीशम, गम्हार, महोगनी, साल, नीम, यूकेलिप्टस, पौपलर, अमलतास, आंवला, सेमल सहित फलदार पौधे अमरुद, जामुन आदि दिया जाता है. आवेदन करने की प्रक्रिया बहुत ही आसान हैं. किसान प्रजाति के अनुसार पौधों की मांग कर सकते हैं. जमीन का कागजात, पहचान पत्र, बैंक खाता के साथ आवेदक की फोटो लगाकर विभाग में आवेदन जमा करना होता है. विभाग ने आवेदन की प्रक्रिया को अधिक सरल बना दिया हैं.
अब बिहार सरकार के पर्यावरण व वन विभाग की वेबसाइट पर जाकर किसी भी जगह से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. इससे समय व श्रम की बचत होती है. इस योजना में सम्मिलित होने के लिए आवेदन अगस्त तक ही किया जा सकता है.
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