लौट गये करोड़ों रुपये
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Apr 2015 7:57 AM (IST)
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लापरवाही. बेरोजगारों को नहीं मिला गव्य विकास योजना का लाभ सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकारी पूरी तरह शिथिलता बरत रहे हैं. इसका नतीजा यह हो रहा है कि जनहित की योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. इसके लिए आने वाले रुपये भी लौट जा रहे हैं. कुछ ऐसा ही मामला […]
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लापरवाही. बेरोजगारों को नहीं मिला गव्य विकास योजना का लाभ
सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकारी पूरी तरह शिथिलता बरत रहे हैं. इसका नतीजा यह हो रहा है कि जनहित की योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. इसके लिए आने वाले रुपये भी लौट जा रहे हैं. कुछ ऐसा ही मामला जिले के गव्य विकास योजना में भी सामने आया है.
गव्य विकास योजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने व बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दुधारू पशु उपलब्ध कराना था. इसके लिए प्रदेश सरकार की तरफ से सभी जिलों को अलग-अलग लक्ष्य दिया गया था.इसे इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करना था. लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के लिए विज्ञापन के माध्यम से भी सभी जिलों के अधिकारियों व लाभुकों को जानकारी उपलब्ध करायी गयी.
इसके बावजूद अधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण गव्य विकास योजना का लाभ लेने से जिले के सैकड़ों बेरोजगार लोग वंचित रह गये और योजना के तहत जिले में आये लगभग एक करोड़ 76 लाख 45 हजार रुपये वापस हो गये हैं.
नवादा (सदर) : पशुपालन व मत्स्य विभाग के अंदर ही समग्र गव्य विकास योजना चल रहा है. इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, स्वरोजगार का सृजन कराना ही मुख्य उद्देश्य है.
साथ ही समाज में पल-बढ़ रहे प्रत्येक व्यक्ति को न्यूनतम पौष्टिक आहार के रूप में दूध व दूधजन्य उत्पाद की उपलब्धता को पूरा करना है. इस योजना का लाभ लेने के लिए बेरोजगारों व किसानों को कई औपचारिकताएं पूरी करनी थी. हालांकि, कई किसानों व बेरोजगारों ने सभी प्रक्रिया को पूरा किया लेकिन उनको भी लाभ नहीं मिला.
डाले गये 289 आवेदन
वित्तीय वर्ष 2014-15 में सैकड़ों आवेदन महीनों पहले जमा किया जा चुका है, जिसमें सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति सहित 289 आवेदन डाला गया है. परंतु, अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले के सैकड़ों बेरोजगारअभी भी इसका लाभ लेने से वंचित रह जायेंगे. साथ ही सरकार की राशि योजना क्रियान्वयन के अभाव में वापस हो जायेगी.
जहां होनी थी सुनवाई
योजना का क्रियान्वयन जिले के जिला गव्य पदाधिकारी, दुग्ध संघ के प्रबंध निदेशक, डेयरी इकाई के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा किया जाना है. लाभुकों से प्राप्त आवेदनों को उक्त क्रियान्वयन एजेंसी 15 दिनों के अंदर जांच कर अनुशंसा के साथ सीधे बैंक को अग्रसारित करेंगी. वहीं प्रत्येक महीने की 10 तारीख को डीएम, डीडीसी इसकी समीक्षा बैंकों के साथ करेंगे, जिसमें जिला गव्य विकास पदाधिकारी व दुग्ध संघ के प्रबंध निदेशक भी उपस्थित रहेंगे. जबकि, दुधारू मवेशियों का क्रय जिले के अंदर मान्यता प्राप्त हाटों से करना है, जोपंचायत के दायरे से बाहर होंगे.
दो एकड़ जमीन जरूरी
इस योजना में सभी वर्गो के किसानों, बेरोजगार युवकों को शामिल किया जाना है. इस योजना के अंतर्गत एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को सहायता प्रदान किया जा सकता हैं. बसर्ते वह सभी अपनी अलग-अलग इकाइयां स्थापित करें. गव्य योजना में वैसे किसानों को 10 या 20 दुधारू मवेशियों की इकाई स्थापित करने के लिए चयन करना है, जिनके पास कम से कम दो एकड़ भूमि उपलब्ध हो, ताकि वह हरा चारा का उत्पादन नियमित कर सके.
योजना के प्रकार
इसके तहत कई तरह की योजना है, जिसके लिए अलग-अलग आवेदन लिये जाते हैं. इसमें दो, पांच, 10 व 20 मवेशी योजना शामिल है. सभी के लिए 50 फीसदी राशि सरकार द्वारा देय अनुदान, लाभान्वित का अंशदान 10 फीसदी व 40 फीसदी बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण की राशि निर्धारित की गयी है.
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