बीइओ व दो एचएम पर गिरी गाज

Updated at : 26 May 2017 4:31 AM (IST)
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बीइओ व दो एचएम पर गिरी गाज

बिहारशरीफ : अस्थावां प्रखंड के मध्य विद्यालय गोबर बिगहा के पूर्व तथा वर्तमान प्रधानाध्यापकों समेत बीइओ राजकुमार यादव पर डीइओ द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर के न्यायालय द्वारा विगत 16 मई को डीइओ नालंदा को आदेश देकर हेडमास्टरों को निलंबित करने तथा बीइओ पर प्रपत्र क गठित कर निलंबन की प्रक्रिया […]

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बिहारशरीफ : अस्थावां प्रखंड के मध्य विद्यालय गोबर बिगहा के पूर्व तथा वर्तमान प्रधानाध्यापकों समेत बीइओ राजकुमार यादव पर डीइओ द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर के न्यायालय द्वारा विगत 16 मई को डीइओ नालंदा को आदेश देकर हेडमास्टरों को निलंबित करने तथा बीइओ पर प्रपत्र क गठित कर निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया है. अस्थावां के बीइओ तथा दो प्रधानाध्यापकों क्रमश:

अजीत कुमार तथा संजीव कुमार की मनमानी के खिलाफ विद्यालय की नवचयनित सचिव राजवंती देवी द्वारा इन पर मनमाने ढंग से विद्यालय का खाता संचालन तथा लगभग 20 लाख रूपये की निकासी किये जाने का मामला लोक शिकायत निवारण में लाया गया था. पूर्व सचिव तैयबा खातून तथा अध्यक्षा सुंदरी देवी की भी मामले में संलिप्तता है. विद्यालय में खाते का संचालन विद्यालय के पदेन सदस्य तथा विद्यालय शिक्षा समिति के सचिव द्वारा संयुक्त रूप से किये जाने का प्रावधान है.

राजवंती देवी पति महेश प्रसाद का सचिव के पद पर चयन 10 जुलाई 2014 को होने के बावजूद इन्हें खाता संचालन का अधिकार नहीं मिला बल्कि हेडमास्टर द्वारा पूर्वसचिव तैयबा खातून के हस्ताक्षर से ही राशि की निकासी की जाती रही. इसमें विद्यालय के भवन निर्माण तथा एमडीएम आदि के लगभग 20 लाख रूपये की निकासी हो गयी. नये सचिव को तरह-तरह से बरगलाकर निकासी का खेल होता रहा. मजबूर होकर नये सचिव राजवंती देवी द्वारा लोक शिकायत निवारण में परिवाद दायर करन पड़ा. अंतत: लगभग पौने तीन वर्ष बाद उन्हें न्याय मिला तथा दोषियों को सजा देने का निर्देश दिया गया है.

मामले में बीइओ की भूमिका
नवचयनित सचिव राजवंती देवी द्वारा बार-बार बीइओ से विद्यालय की राशि का मनमाने ढंग से निकासी किये जाने की शिकायत की जाती रही. बीइओ काफी आनाकानी के बाद पत्र जारी कर पूर्व सचिव के माध्यम से राशि निकासी पर रोक लगायी फिर एक सप्ताह बाद ही दूसरा पत्र जारी कर पूर्व सचिव को ही वैध ठहरा दिया. बल्कि इस दौरान भवन निर्माण तथा एमडीएम की राशि की निकासी बीइओ की जानकारी में होते रही. राजवंती देवी सचिव के पद पर निर्वाचित होने के बावजूद खाता संचालन सहित अन्य सभी अधिकारी से अब तक वंचित रही. यदि प्रमंडलीय आयुक्त के आदेशों का पालन किया जाता है तो दोषियों को सजा तथा राजवंती देवी को न्याय मिल सकेगा.
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