फ्लोराइड प्रभावित 130 वार्डों की कार्ययोजना तैयार

Updated at : 09 May 2017 12:02 AM (IST)
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फ्लोराइड प्रभावित 130 वार्डों की कार्ययोजना तैयार

50 वार्डों में चल रहा है शुद्ध जलापूर्ति का काम 80 वार्डों की डीपीआर तैयार करें 15 मई तक मुख्यालय को भेजने का निर्देश बिहारशरीफ : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के फ्लोराइड प्रभावित 130 वार्डों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पटना में विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. […]

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50 वार्डों में चल रहा है शुद्ध जलापूर्ति का काम

80 वार्डों की डीपीआर तैयार करें
15 मई तक मुख्यालय को भेजने का निर्देश
बिहारशरीफ : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के फ्लोराइड प्रभावित 130 वार्डों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए पटना में विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में जानकारी दी गयी कि जिले के 130 वार्डों में काम किया जाना बाकी है. विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने इस सभी वार्डों का डीपीआर तैयार कर 15 मई 2017 तक अनिवार्य रूप से मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया है. इस निर्देश के आलोक मे जिले के पीएचइडी के अधिकारी जी-जान से डीपीआर तैयार करने में जूटे हुए हैं. 80 वार्डों में से 59 वार्डों के लिए विभाग द्वारा डीपीआर तैयार कर लिया गया है, बाकी बचे वार्डों का डीपीआर करने के लिए तेजी से कार्य किये जा रहे हैं.
हाउस होल्ड के आधार पर बन रहा डीपीआर :
फ्लोराइड प्रभावित वार्डों का डीपीआर हाउस होल्ड के आधार पर तैयार किया जा रहा है. इन वार्डों के सभी गलियों की मापी कर, सभी परिवारों के नाम सूची में दर्ज किये जा रहे हैं. इसके बाद पंचायत के मुखिया व वार्ड सदस्य की उपस्थिति ग्रामीणों की बैठक कर यह निर्धारित किया जा रहा है कि किस स्थान पर बोरिंग किया जायेगा. फ्लोराइड से सबसे ज्यादा सिलाव, राजगीर व बेन प्रखंड के वार्ड शामिल है.
फ्लोरोसिस का बढ़ता जा रहा था खतरा :
जिले के 130 ग्रामीणों के पानी ने फ्लोराइड की मात्रा पाये जाने से उस क्षेत्र के लोगों में फ्लोरोसिस का खतरा बढ़ता जा रहा था. इस बीमारी से ग्रस्त होने वालों में बच्चों की संख्या अधिक थी. फ्लोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों की हड्डियों एवं दांतों को कमजोर बना देती है. यहीं नहीं पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा के कारण महिलाओं में थाइराइड एवं गुर्दे के उतकों एवं एंजाइम की क्रियाकलाप को प्रभावित करने लगती है. फ्लोरोसिस से सर्वाधिक प्रभावित होने वालों में 07 से 12 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे है, जो दांत संबंधी फ्लोरोसिस से त्रस्त है.
प्रभात खबर ने प्रकाशित की थी खबर
प्रभात खबर ने इस संबंध में 01 मई 2017 को जिले के 161 गांवों केे पानी में फ्लोराइड की मात्रा पाये जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी. खबर प्रकाशित होने के बाद पीएचइडी एवं विश्व बैंक के अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया. इन अधिकारियों ने दो दिनों तक पटना में बैठक कर मामले की समीक्षा के बाद पीएचइडी को फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल्द डीपीआर बनाने का निर्देश दिया है.
क्या कहते हैं अधिकारी:
” जिले के 130 ग्रामीण वार्डों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा पायी गयी है. इनमें में 50 वार्डों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य पूर्व से किया जा रहा है. बाकी बचे 80 वार्डों के लिए डीपीआर तैयार कर 15 मई तक अनिवार्य रूप से मुख्यालय को भेजने का आदेश दिया गया है. इन 80 वार्डों में से 59 वार्डों का डीपीआर तैयार हो चुका है, शेष 21 वार्डों का डीपीआर बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है”
मनोज कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी, बिहारशरीफ
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