नालंदा के खंडहर को देखा भूटान की रानी ने
Updated at : 01 Jan 2017 3:12 AM (IST)
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शनिवार को नालंदा विवि में पूजा-अर्चना करते भूटना की महारानी व अन्य. बिहारशरीफ/सिलाव/नालंदा : भूटान नरेश जिग्मे सिंगये वांगयूक की पत्नी महारानी दोरजी वांग्मो वांगचूक, उनकी बेटी सोनम डेचन वोंगचूक व सोनम के तीन वर्षीय पुत्र जिगमे जिंगतेन वांगचूक सहित दस सदस्यीय टीम शनिवार को नालंदा खंडहर देखने पहुंचे. भूटान की रानी अपनी टीत के […]
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शनिवार को नालंदा विवि में पूजा-अर्चना करते भूटना की महारानी व अन्य.
बिहारशरीफ/सिलाव/नालंदा : भूटान नरेश जिग्मे सिंगये वांगयूक की पत्नी महारानी दोरजी वांग्मो वांगचूक, उनकी बेटी सोनम डेचन वोंगचूक व सोनम के तीन वर्षीय पुत्र जिगमे जिंगतेन वांगचूक सहित दस सदस्यीय टीम शनिवार को नालंदा खंडहर देखने पहुंचे. भूटान की रानी अपनी टीत के साथ करीब तीन घंटे प्राचीन नालंदा विश्व विद्यालय के खंडहर में गुजारे एवं वहां पूजा-अर्चना की. राजकुमारी सोनम डेचन वांगचूक ने बताया कि उनका पुत्र अभी केवल तीन वर्ष का है. जब वह बोलने लगा तब से वह नालंदा का रट लगा रखा है. वह अपना नाम बेराचना लोचन कहता है और बताता है कि वह नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ता है. हमें नालंदा ले चलो.
सोनम की बात मानें तो वह पूर्व जन्म में लगभग आठवीं शताब्दी में नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ता था. इसका उस समय का नाम बेराचना लोचन था. वह अब कह रहा है कि वह वांगचूक नहीं लोचवा है. वह रह रह कर अपने पूर्व जन्म और नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र जीवन की बातें बताता रहा है. वह कहां पढ़ता था और कहां विपाश्ना करता था. सारी बातें विस्तार से बता रहा था. विश्वविद्यालय में कहां खाना बनता था . वह किस जगह सोता था. प्राचार्य कौन थे. प्राचार्य का कमरा कौन था. यह सब कुछ तीन साल का बालक ऐसे बता रहा था कि मानो सभी बातें उसे याद है. तीन वर्षीय बालक की बात सुनकर वहां मौजूद डीडीसी कुंदन कुमार, नगर आयुक्त कौशल कुमार, नालंदा थानाध्यक्ष प्रभा कुमारी सहित वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गये. बालक जिग्मे जिंगतन वांगचूक की मां राजकुमारी सोनम डेचन वांगचून ने बताया कि उसका पुत्र पहली बार नालंदा आया है. वह अपने आपको नालंदा विश्वविद्यालय का छात्र बेराचना लोचवा बता रहा है. उसके बारे में जब जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि आठवीं शताब्दी में भूटान का छात्र बेराचना लोचवा नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने आया था. बेराचना लोचवा संस्कृत के साथ कई भाषाओं के विद्धान हुए थे.नालंदा में ही रहकर शिक्षा देने लगे थे. मेरे पुत्र ने खंडहर की पूजा भी की.
उसकी पूजा इस प्रकार से की मानो उसे पूजा करने की पूरी विधि मालूम है.
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