नहाय- खाय के साथ छठ शुरू

Updated at : 05 Nov 2016 12:15 AM (IST)
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नहाय- खाय के साथ छठ शुरू

आयोजन. कल से निर्जला उपवास, छठ गीतों से गूंजायमान हुआ क्षेत्र स्नान के बाद पूजा करतीं छठवर्ती. व्रतियों ने नदी-तालाबों में स्नान कर बनाये प्रसाद बिहारशरीफ : सूर्योपासना का चार दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया. जिले के हजारों व्रतियों ने पवित्र नदियों तथा तालाबों में स्नान कर छठ व्रत […]

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आयोजन. कल से निर्जला उपवास, छठ गीतों से गूंजायमान हुआ क्षेत्र

स्नान के बाद पूजा करतीं छठवर्ती.
व्रतियों ने नदी-तालाबों में स्नान कर बनाये प्रसाद
बिहारशरीफ : सूर्योपासना का चार दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया. जिले के हजारों व्रतियों ने पवित्र नदियों तथा तालाबों में स्नान कर छठ व्रत के नहाय खाय का प्रसाद तैयार किया. लोगों ने पूरी आस्था के साथ भगवान सूर्यदेव को प्रसाद अर्पित कर अपने परिजनों तथा ईस्ट मित्रों को नहाय खाय का प्रसाद वितरित किया. जिले के विभिन्न सूर्यधामों औंगारी,बड़गांव व पावापुरी में तो प्रथम दिन से ही छठ व्रतियों का तांता लग गया. बड़गांव सूर्य मंदिर तालाब, पावापुरी स्थित सूर्य तालाब तथा औंगारीधाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूबे के विभिन्न जिलों समेत झारखंड,
बंगाल तथा उडि़सा राज्यों से आकर छठ व्रत करने के लिए सैकड़ों की संख्या में तंबू गाड़ चुके हैं. छठ तालाबों के आसपास मेला जैसा महौल बन गया है. हर तंबू के बाहर सुबह से ही छठ व्रतियों द्वारा मिट्टी के चुल्हों पर चावल, दाल,कदुआ आदि का प्रसाद बनाये जाने लगा. छठ गीतों तथा क्षेत्रिय गीतों की मधुर स्वर लहरियों से चारों ओर धार्मिक वातावरण बन गया है. छठ व्रतियों की आस्था की यह परकाष्ठा ही है कि हजारों छठ व्रती दो दिनों का उपवास रखकर तथा तम्बुओं में सपरिवार गुजारा करते हुए इसी कठिन तपस्या को पूरी करते हैं.देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों वर्षों से सूर्योपासना का पर्व छठ लोगों की आस्था को मजबूरी प्रदान करता आ रहा है.
पौराणिक कथाओं में भगवान रामचंद्र,बलराम, द्रौपदी,श्रीकृष्ण के प्रपौत्र राजा साम्ब आदि के द्वारा सूर्योपासना का वर्णन मिलता है. सूर्योपासना से सभी लोगों की मनोरथ पूरी होती है. सूर्योपासना के संबंध में कहा जाता है कि सूर्य साक्षात ईश्वर हैं. सूर्य को भगवान नारायण का ही रूप माना जाता है.नालंदा जिला प्राचीन काल से ही सूर्योपासना का प्रमुख केंद्र रहा है. बड़गांव का सूर्य मंदिर, औंगारी स्थित सूर्यधाम तथा पावापुरी स्थित सूर्यमंदिर तथा विशाल तालाब आज भी सूर्योपासना के प्रमुख केंद्र है.
हालांकि जिले के लगभग दर्जन भर अन्य स्थलों पर भी सूर्य मंदिर का निर्माण कर सूर्योपासना की जाती है. सैकड़ों वर्षों से हिंदू धर्माबलंबी आज भी इन सूर्यधामों पर प्रतिवर्ष छठ पूजन करने आते हैं.देश के विभिन्न हिस्सों में नौकरी या व्यवसाय करने वाले जिलेवासी छठ व्रत के मौके पर बड़ी संख्या में अपने घर वापस आ रहे हैं. यह छठ व्रत की महता ही है कि प्रवासी अन्य त्योहारों में अपने घर आये अथवा न आये, लेकिन छठ व्रत में आना नहीं भूलते हैं. दिल्ली, कोलकाला, सूरत, लुधियाना, जालंधर, मुम्बई, चेन्नई आदि कई दर्जन शहरों में रहने वाले जिलेवासी हर रोज छठ व्रत पर अपने घर आज रहे हैं.
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